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जीएसटी की धारा 83 का दायरा बढ़ा: टैक्स कम बताया तो व्यापारी के साथ सीए की प्रॉपर्टी व बैंक खाता भी सीज हाेगा

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जीएसटी की धारा 83 का दायरा बढ़ा: टैक्स कम बताया तो व्यापारी के साथ सीए की प्रॉपर्टी व बैंक खाता भी सीज हाेगा

सरकार ने जीएसटी में टैक्स चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट में घालमेल रोकने के लिए नए नियम जोड़े हैं। ये नियम व्यापारियों, टैक्स प्रोफेशनल के लिए परेशानी बन रहे हैं। अब धारा 83 के तहत कारोबारी की केवल टैक्स डिमांड के समय ही नहीं, बल्कि रिटर्न में गलती, टैक्स चोरी, ई-वे बिल में गलती पर भी कारोबारी की प्रॉपर्टी, खाते अटैच किए जा सकते हैं।

सीए, कर सलाहकार के साथ ही कारोबारी करदाता से जुड़े अन्य भी इस दायरे में उलझ सकते हैं। क्योंकि अब इस कार्रवाई में करदाता के साथ ही व अन्य शब्द भी जोड़ दिया गया है। यानी अधिकारी टैक्स संबंधी मामले में कई लोगों पर कार्रवाई कर सकते हैं।

ये बात आपके लिए जानना जरूरी: ई-वे बिल की एक दिन में वैधता 100 से बढ़ाकर 200 किलोमीटर की

यदि कारोबारी का स्क्रूटनी के दौरान रिटर्न गलत मिलने के साथ गलत क्रेडिट लिया, टैक्स कम बता दिया जाता है, माल परिवहन के दौरान टैक्स चोरी में गाड़ी पकड़ी जाती है, तो करदाता पर कार्रवाई होने के साथ ही इसमें शामिल कंपनी के डायरेक्टर, सीए, कर सलाहकार या अन्य किसी भी व्यक्ति के प्रॉपर्टी, बैंक खाते अटैच किए जा सकते हैं।

ई-वे बिल की एक दिन में वैधता 100 किलोमीटर से बढ़ाकर 200 किलोमीटर तक कर दी गई है। इससे लोगों को राहत भी मिलेगी। बजट में जीएसटी की धारा 83 में पहले अधिकारी किसी कारोबारी के यहां छापा मारने या जांच आदि होने के बाद उसके असेसमेंट (टैक्स डिमांड निकालने की प्रक्रिया) के दौरान संबंधित कमिश्नर की मंजूरी से प्रॉपर्टी अटैचमेंट, बैंक खाता सील करता था, मगर नए बजट में धारा 83 का दायरा बढ़ने से नए प्रावधान जुड़ गए हैं।

इसके अनुसार अगर किसी कारोबारी का स्क्रूटनी के दौरान रिटर्न गलत मिलता है और फ्रॉड कर गलत क्रेडिट लिया जाता है, टैक्स कम बताया दिया जाता है, माल परिवहन के दौरान टैक्स चोरी में गाड़ी पकड़ी जाती है, तो असेसमेंट ऑफिसर कमिश्नर से मंजूरी लेकर कारोबारी की प्रॉपर्टी और बैंक खाते अटैच कर सकता है। नए नियम से जीएसटी में प्रक्रिया सरल होने की बजाय उलझती जा रही है। जुलाई 2017 से लेकर 462 अधिसूचनाएं निकालकर नियमों में संशोधन कर चुके हैं। बार-बार नियमों में बदलाव की वजह से हर बार प्रक्रिया को अपडेट करना पड़ता है।

जितना क्रेडिट उतना ही क्लेम::बजट में इनपुट टैक्स क्रेडिट का नियम भी बदल गया है। अब जितना क्रेडिट कारोबारी के रिटर्न 2ए में दिखेगा उतना ही वह क्रेडिट क्लेम कर सकेगा। जिन कारोबारी की कर योग्य बिक्री 50 लाख प्रति माह से अधिक है उन्हें कुल टैक्स का एक फीसदी नकद देना होगा।

ई-वे बिल पर पेनल्टी 25 फीसदी: ई-वे बिल में अब एक दिन की वैधता 200 किलोमीटर तक होगी। पहले 100 किलोमीटर थी। इसमें विभाग का मानना था कि एक ही बिल पर कई बार ट्रांसपोर्टर माल का परिवहन कर टैक्स चोरी कर लेते हैं। पहले ई-वे बिल के प्रावधान के उल्लंघन पर पेनल्टी की 10 फीसदी के बराबर राशि जमा करने पर अपील हो सकती थी, लेकिन अब नए नियम से पेनल्टी व टैक्स दोनों मिलाकर कुल 25 फीसदी हो सकेगी। ई-वे बिल में गड़बड़ी पाए जाने पर पहले 1000 रुपए पर 100 रुपए की पेनल्टी भुगतनी पड़ती थी, नए प्रावधान के तहत अब यह बढ़कर 250 रुपए हो गई है।

व्यापारी बोले- नए नियमाें से काेराेबार करना मुश्किल हाेगा
पदमपुर व्यापार मंडल अध्यक्ष विजय कालड़ा का कहना है कि केंद्र के बजट में जीएसटी के नए प्रस्तावित नियमों से तो कारोबार करना ही मुश्किल हो जाएगा। सरकार को इस पर राहत देनी चाहिए। व्यापारी भोज राज जैन का कहना है, ऐसे प्रावधानों से तो अच्छा है कि व्यापारी अपनी दुकान, कारोबार बंद कर इस राशि की एफडी करा ले और ब्याज की राशि से ही अपना घर चलाए।

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