BAP के लिए चुनावी मैदान छोड़ेगी कांग्रेस या घोषित करेगी उम्मीदवार? 24 घंटे में लेना होगा फैसला

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BAP के लिए चुनावी मैदान छोड़ेगी कांग्रेस या घोषित करेगी उम्मीदवार? 24 घंटे में लेना होगा फैसला
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BAP के लिए चुनावी मैदान छोड़ेगी कांग्रेस या घोषित करेगी उम्मीदवार? 24 घंटे में लेना होगा फैसला

लोकसभा चुनावों के दूसरे चरण में 26 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए 4 अप्रैल अंतिम तिथि है. बावजूद इसके बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र के लिए कांग्रेस पार्टी ने अभी तक ना तो प्रत्याशी घोषित किया और ना ही भारत आदिवासी पार्टी से गठबंधन को लेकर कोई घोषणा की है. ऐसे में स्थानीय कांग्रेस नेताओं के लिए परेशानी का सबब बन गया है कि चुनाव लड़ना है या गठबंधन होगा? इसको लेकर आलाकमान ने अभी तक पत्ते नहीं खोले हैं.

स्थानीय नेता गठबंधन के इच्छुक नहीं
आजादी के बाद यह पहली बार होगा कि चुनावी मैदान में कांग्रेस पार्टी का कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं होगा और वह भारत आदिवासी पार्टी के लिए यह सीट छोड़ देगी. स्थानीय नेता भले ही इसके लिए इच्छुक नहीं हैं, लेकिन जिस तरह नागौर और सीकर जिले में गठबंधन हुआ है, उससे लगता है कि यहां भी कांग्रेस यहां से प्रत्याशी की घोषणा नहीं करेगी. पिछले दिनों कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे पत्र में एआईसीसी सदस्य दिनेश खोड़निया, बांसवाडा विधायक अर्जुन सिंह बामनिया, घाटोल विधायक नानालाल निनामा, कुशलगढ़ विधायक रमिला खड़िया, खेरवाड़ा विधायक दयाराम परमार, बांसवाड़ा कांग्रेस जिला अध्यक्ष रमेश चंद्र पंड्या, डूंगरपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष वल्लभराम पाटीदार सहित अन्य नेताओं ने कांग्रेस आलाकमान से कहा है कि भविष्य की संभावना को देखते हुए लोकसभा चुनाव के लिए भारत आदिवासी पार्टी से किसी भी तरह का गठबंधन नहीं किया जाना चाहिए.

कभी कांग्रेस का गढ़, अब गठबंधन का आसरा
बांसवाड़ा संसदीय क्षेत्र शुरू से कांग्रेस का गढ़ रहा है. यहां 2019 तक हुए 16 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 11 बार जीती है. 1952 से 1971 तक के लगातार 5 चुनावों में कांग्रेस यहां से जीती.1977 में जनता पार्टी के खाते में यह सीट जाने के बाद 1980, 1984 में दोबारा यहां कांग्रेस का परचम लहराया. 1989 में दोबारा यहां जनता दल की वापसी हुई. 1991 से 1999 तक लगातार चार चुनावों में यहां से कांग्रेस जीती और 2004 में बीजेपी की जीत के बाद 2009 में कांग्रेस के ताराचंद भगौरा यहां से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे, लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव और 2014 के आम चुनावों में कांग्रेस के गढ़ होने का मिथक टूट गया.

Will Congress leave the electoral field for BAP or declare its candidate? Decision will have to be taken in 24 hours

April 4 is the last date for filing nomination papers for the second phase of Lok Sabha elections to be held on April 26. Despite this, the Congress Party has neither declared a candidate for the Banswara-Dungarpur Lok Sabha constituency nor made any announcement regarding alliance with Bharat Adivasi Party. In such a situation, it has become a problem for the local Congress leaders whether to contest the elections or there will be an alliance? The high command has not yet opened its cards regarding this.

Local leaders are not interested in alliance
This will be the first time after independence that Congress Party will not field any candidate in the election field and it will leave this seat for Bharat Adivasi Party. Even though the local leaders are not interested in this, the way the alliance has been formed in Nagaur and Sikar districts, it seems that Congress will not announce the candidate from here also. Recently, in a letter written to Congress National President Mallikarjun Kharge, AICC member Dinesh Khodnia, Banswara MLA Arjun Singh Bamnia, Ghatol MLA Nanalal Ninama, Kushalgarh MLA Ramila Khadiya, Kherwara MLA Dayaram Parmar, Banswara Congress District President Ramesh Chandra Pandya, Dungarpur Congress District President Vallabharam Patidar and other leaders have told the Congress high command that keeping in view the future prospects, no alliance should be made with Bharat Adivasi Party for the Lok Sabha elections.

Once the stronghold of Congress, now the support of alliance
Banswara parliamentary constituency has been a stronghold of Congress since the beginning. Congress has won 11 times in the 16 Lok Sabha elections held here till 2019. Congress won from here in 5 consecutive elections from 1952 to 1971. After this seat went to Janata Party in 1977, Congress flag was hoisted here again in 1980 and 1984. Janata Dal returned here again in 1989. From 1991 to 1999, Congress won four consecutive elections from here and after BJP's victory in 2004, Congress's Tarachand Bhagaura reached Parliament by winning the elections from here in 2009, but the myth of Congress being a stronghold in the 2013 assembly elections and 2014 general elections. broke down.

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