पुराने आम बजट में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए क्या हुई थी घोषणाएं, अब हैं बड़ी उम्मीदें

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पुराने आम बजट में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए क्या हुई थी घोषणाएं, अब हैं बड़ी उम्मीदें
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पुराने आम बजट में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए क्या हुई थी घोषणाएं, अब हैं बड़ी उम्मीदें

देश का आम बजट एक फरवरी को पेश होगा। सरकार की ओर से इस बजट में आने वाले वित्तीय वर्ष में किस तरह के विकास के लिए क्या लक्ष्य रखा जाएगा, इसकी जानकारी मिलेगी। लेकिन पिछले सालों के दौरान ऑटोमोबाइल सेक्टर को बजट से क्या मिला और आने वाले बजट से इस सेक्टर को क्या उम्मीद हैं। हम इसकी जानकारी आपको इस खबर में दे रहे हैं।

पिछले बजट में क्या रहा खास
मोदी सरकार की ओर से साल 2023 के बजट में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए कई खास घोषणाएं की गईं। पिछले बजट में सरकार का पूरा फोकस ग्रीन एनर्जी पर रहा। सरकार 2030 तक हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत पांच एमएमटी का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य रखा था। इसके साथ ही सरकार की ओर से पुराने हो चुके वाहनों को स्क्रैप करने पर भी घोषणा की गई थी। इलेक्ट्रिक वाहनों को सस्ता करने के लिए भी पिछले बजट में सरकार ने एलान किया था। इसके अलावा सरकार की ओर से पिछले बजट में इस बात का भी एलान किया गया था कि एसकेडी, सीबीयू और इलेक्ट्रिक सीबीयू वाहनों को महंगा किया जाएगा।

पुराने बजट में हुए थे ये एलान
साल 2022 के आम बजट के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री की ओर से ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी का एलान किया गया था। जिसके तहत सरकार निजी कंपनियों को बैटरी स्वैपिंग स्टेशन और प्रोद्योगिकी स्थापित करने की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने की घोषणा भी हुई थी। लेकिन टैक्स कटौती और संशोधित शुल्क संरचना, बढ़ती इनपुट लागत से उबरने जैसी चीजों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

साल 2021 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी का एलान भी किया था। इसके अलावा इसी बजट में सरकार की ओर से स्टील उत्पादों पर आयात शुल्क को कम किया था । कई राज्यों में हाइवे निर्माण का एलान भी किया गया था।

साल 2020 में जब कोरोना महामारी दुनियाभर में फैल रही थी। तब देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर भी काफी खराब स्थिति का सामना कर रहा था। लेकिन उस साल में ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर आम बजट में कोई खास एलान नहीं किया गया था।

साल 2019 के आम बजट में भी केंद्र सरकार का फोकस इलेक्ट्रिक वाहनों पर रहा था। तब भी सरकार की ओर से जीएसटी को 12 फीसदी से कम करते हुए पांच फीसदी किया गया था। इसके साथ ही सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपये का विशेष आवंटन भी किया था, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा मिल पाए।

साल 2018 के आम बजट के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री अरूण जेटली ने घोषणा की थी कि इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक लाख करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत करीब 35 हजार किलोमीटर की सड़कों को बनाने का काम तेज किया जाएगा।

2024 में हैं क्या उम्मीदें
इस साल के बजट से भी ऑटोमोबाइल सेक्टर को काफी उम्मीदें हैं। सबसे बड़ी उम्मीद इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी पर सरकार से सेक्टर राहत चाहता है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए फेम-2 सब्सिडी को फेम-3 के तहत आगे बढ़ाने की भी उम्मीद की जा रही है, क्योंकि फेम-2 सब्सिडी योजना मार्च 2024 तक खत्म होने जा रही है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए भी कई जानकारी उम्मीद कर रहे हैं। वाहनों और स्पेयर पार्ट्स पर लगने वाले टैक्स को कम करने की आशा भी कुछ निर्माता कर रहे हैं।

What were the announcements made for the automobile sector in the old general budget, now there are big expectations

The country's general budget will be presented on February 1. In this budget, you will get information about what kind of development targets will be set by the government in the coming financial year. But what did the automobile sector get from the budget during the last years and what does the sector expect from the upcoming budget. We are giving you this information in this news.

What was special in the last budget?
Many special announcements were made by the Modi government in the budget of 2023 for the automobile sector. In the last budget, the government's entire focus was on green energy. The government had set an annual production target of five MMT by 2030 under the Green Hydrogen Mission. Along with this, the government had also announced scrapping of old vehicles. The government had also announced in the last budget to make electric vehicles cheaper. Apart from this, it was also announced by the government in the last budget that SKD, CBU and electric CBU vehicles will be made costlier.

These announcements were made in the old budget
During the general budget of 2022, the battery swapping policy for the automobile sector was announced by the Union Finance Minister. Under which the government encouraged private companies to participate in the process of setting up battery swapping stations and technology. Apart from this, an announcement was also made to encourage electric vehicles in public transport. But there were no changes in things like tax cuts and revised duty structure to overcome rising input costs.

In the budget of 2021, Finance Minister Nirmala Sitharaman had also announced the vehicle scrap policy. Apart from this, in this budget the government had reduced the import duty on steel products. Highway construction was also announced in many states.

In the year 2020, when the Corona epidemic was spreading across the world. At that time the automobile sector in the country was also facing a very bad situation. But in that year no special announcement was made in the general budget regarding the automobile sector.

Even in the general budget of 2019, the central government's focus was on electric vehicles. Even then, the government had reduced GST from 12 percent to five percent. Along with this, the government had also made a special allocation of Rs 10 thousand crores, so that electric vehicles could be promoted rapidly.

During the general budget of 2018, the then Finance Minister Arun Jaitley had announced that Rs 1 lakh crore would be allocated for infrastructure. Under the Bharat Mala Project, the work of constructing about 35 thousand kilometers of roads will be expedited.

What are the expectations in 2024
The automobile sector also has high expectations from this year's budget. The biggest hope is that the sector wants relief from the government on the increase in input costs. Along with this, it is also expected to extend the FAME-2 subsidy under FAME-3 to promote electric vehicles, because the FAME-2 subsidy scheme is going to end by March 2024. Many investors are also hoping to increase the charging infrastructure. Some manufacturers are also hoping to reduce the tax on vehicles and spare parts.

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