पेपर लीक केस में ED का एक्शन, आज जब्त हो सकती है पूर्व RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा की संपत्ति

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पेपर लीक केस में ED का एक्शन, आज जब्त हो सकती है पूर्व RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा की संपत्ति
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पेपर लीक केस में ED का एक्शन, आज जब्त हो सकती है पूर्व RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा की संपत्ति

राजस्थान पेपर लीक मामले  में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय  की टीम आज राजस्थान लोक सेवा आयोग  के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा की संपत्ति जब्त कर सकती है. इस कार्रवाई की गाज कटारा के बेटे दीपेश पर भी गिर सकती है, क्योंकि डूंगरपुर और उसके आसपास के गांवों में दोनों की करोड़ों रुपये की संपत्ति है. कहा जा रहा है कि कुछ ही देर में ईडी के अधिकारी यहां पहुंचकर बाप-बेटे दोनों की संपत्तियों को सीज कर सकते हैं. 

मालपुरा का रहने वाला है कटारा
बाबूलाल कटारा डूंगरपुर जिले के भाटपुर ग्राम पंचायत के मालपुर गांव का रहने वाला है. 2 नवंबर 1987 को वह तृतीय श्रेणी शिक्षक बना था. करीब 2 साल बाद 1990 में वह अर्थशास्त्र के व्याख्याता बन गया था. अगले ही साल 1991 में बाबूलाल कटारा जिला सांख्यिकी अधिकारी बन गया था. इस दौरान उदयपुर संभाग में विभिन्न जगह पर कटारा ने सेवाएं दी. वर्ष 1994 से लेकर 2005 तक विकास अधिकारी के रूप में काम किया. फिर संयुक्त निदेशक सांख्यिकी सचिवालय में सेवाएं दी. वर्ष 2013 से वीआरएस लेने तक उदयपुर के माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान में निदेशक का पद संभाला.

गहलोत ने राज्यपाल से की थी सिफारिश
अक्टूबर 2020 में गहलोत सरकार ने बाबूलाल कटारा को राजस्थान लोक सेवा आयोग का सदस्य बनने के लिए की सिफारिश की थी. राज्य सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल ने कटारा को आरपीएससी के सदस्य के रूप में नियुक्ति प्रदान की. इस नियुक्ति के पीछे गहलोत सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग को खुश करना था. दरअसल वर्ष 2020 में डूंगरपुर क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति और आदिवासी समुदाय के लोगों ने बड़ा आंदोलन किया था. डूंगरपुर बांसवाड़ा में अनुसूचित जनजाति के हजारों लोगों ने शिक्षक भर्ती 2018 में सामान्य श्रेणी के 1167 पदों पर अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को नियुक्त देने की मांग की थी. उस आंदोलन के दौरान भारी हिंसा हुई जिसने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया था. हिंसा के दौरान दो लोगों की मौत भी हुई. उन दिनों अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को खुश करने के लिए गहलोत सरकार ने बाबूलाल कटारा की नियुक्ति RPSC के सदस्य के रूप में करने की सिफारिश की थी.

ऐसे सामने आया था कटारा का नाम
दिसंबर 2022 में जब वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक प्रकरण सामने आया तो इस मामले की जांच उदयपुर पुलिस के साथ एसओजी को सौंपी गई थी. एसओजी ने अपनी जांच के दौरान कड़ी से कड़ी जोड़ते हुई पेपर लीक माफियाओं को गिरफ्तार किया. पिछले दिनों सरकारी स्कूल का एक वाइस प्रिंसिपल शेर सिंह मीणा एसओजी की गिरफ्त में आया. शेर सिंह से हुई पूछताछ में यह पता चला कि उसे यह पेपर आरपीएससी के सदस्य बाबूलाल कटारा ने दिया था. इसके बाद एसओजी ने बाबूलाल कटारा, उसके ड्राइवर गोपाल सिंह और भांजे विजय डामोर को पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तार कर लिया.

ED action in paper leak case, property of former RPSC member Babulal Katara may be confiscated today

Taking major action in the Rajasthan Paper Leak Case, the Enforcement Directorate (ED) team can seize the property of former Rajasthan Public Service Commission (RPSC) member Babulal Katara today. The blame for this action may also fall on Katara's son Deepesh, because both of them have property worth crores of rupees in Dungarpur and its surrounding villages. It is being said that ED officials can reach here within some time and seize the properties of both father and son.

Katara is a resident of Malpura
Babulal Katara is a resident of Malpur village of Bhatpur Gram Panchayat of Dungarpur district. He became a third grade teacher on November 2, 1987. About two years later, in 1990, he became a lecturer in economics. The very next year in 1991, Babulal became the Katara District Statistics Officer. During this period, Katara served at various places in Udaipur division. Worked as Development Officer from 1994 to 2005. Then served as Joint Director Statistics Secretariat. From 2013 till he took VRS, he held the post of Director at Manikyalal Verma Tribal Research and Training Institute, Udaipur.

Gehlot had recommended to the Governor
In October 2020, the Gehlot government had recommended Babulal Katara to become a member of the Rajasthan Public Service Commission. On the recommendation of the state government, the Governor appointed Katara as a member of RPSC. The reason behind this appointment was to please the Scheduled Tribe category of the Gehlot government. In fact, in the year 2020, people of Scheduled Tribe and Tribal community had organized a big movement in Dungarpur area. Thousands of Scheduled Tribe people in Dungarpur Banswara had demanded appointment of Scheduled Tribe candidates on 1167 posts of general category in teacher recruitment 2018. There was heavy violence during that movement in which many vehicles were set on fire. Two people also died during the violence. In those days, to please the people of Scheduled Tribe community, Gehlot government had recommended the appointment of Babulal Katara as a member of RPSC.

This is how Katara's name came to light
When the senior teacher paper leak issue came to light in December 2022, the investigation of this matter was handed over to SOG along with Udaipur Police. During its investigation, SOG connected the links and arrested the paper leak mafias. Recently, Sher Singh Meena, a vice principal of a government school, was caught by SOG. During the interrogation of Sher Singh, it was revealed that this paper was given to him by RPSC member Babulal Katara. After this, SOG arrested Babulal Katara, his driver Gopal Singh and nephew Vijay Damor in the paper leak case.

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