सुप्रीम कोर्ट से बाबा रामदेव को फिर मिला झटका, योग शिविर के लिए अब चुकाना होगा इतने करोड़ का सर्विस टैक्स

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सुप्रीम कोर्ट से बाबा रामदेव को फिर मिला झटका, योग शिविर के लिए अब चुकाना होगा इतने करोड़ का सर्विस टैक्स

सुप्रीम कोर्ट से बाबा रामदेव को फिर मिला झटका, योग शिविर के लिए अब चुकाना होगा इतने करोड़ का सर्विस टैक्स

योग गुरू कहे जाने वाले बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर से झटका लगा है. दरअसल, रामदेव के 'पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट' संस्था को अब सेवा शुल्क यानी कि सर्विस टैक्स चुकाना पड़ेगा. क्योंकि योग शिविर सर्विस टैक्स के दायरे में आ गया है. इस संबंध में सर्विस टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल के फैसले को सर्वोच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस अभय एम ओके की पीठ ने बरकरार रखा है. जिसमें पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को गैर आवासीय और आवासीय दोनों योग शिविरों के आयोजन के लिए सर्विस टैक्स का भुगतान अनिवार्य बताया था. 
 
 
आपको बता दें, रामदेव के योग शिविरों के आयोजन में पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट वहां पहुंचने वाले लोगों से एंट्री फीस (प्रवेश शुल्क) लेती है. वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एम ओके और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ''सर्विस टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल ने सही कहा है कि एंट्री फीस लेने के बाद तो शिविरों में योग एक सेवा (सर्विस) है. ऐसे में ट्राइब्यूनल के आदेश में हस्तक्षेप करने का हमें कोई कारण बनता नजर नहीं आता है. लिहाजा 'पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट' की अपील खारिज कर दी जाती है.'' इसके साथ ही कोर्ट ने उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क और सेवा कर (सर्विस टैक्स) अपीलीय ट्राइब्यूनल की 5 अक्टूबर, 2023 के इलाहाबाद पीठ के आदेशों में अपना हस्तक्षेप करने से साफ मना कर दिया.  
 
4.5 करोड़ का चुकाना होगा सर्विस टैक्स
केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क, मेरठ रेंज के आयुक्त ने योग गुरू बाबा रामदेव के संस्था 'पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट' से जुर्माना और ब्याज के साथ अक्टूबर 2006 से मार्च 2011 के बीच लगाए गए ऐसे शिविरों को लेकर करीब 4.5 करोड़ अदा करने का निर्देश दिया है. पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट ने इन योग शिविरों के जरिए ये दलील दी थीं कि वे ऐसी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं जिनसे बीमारियों का इलाज होता है और यह 'हेल्थ एंड फिटनेस सर्विस' कैटेगरी के तहत टैक्स योग्य नहीं है. इसपर ट्राइब्यूनल ने कहा कि यह दावा किसी भी सकारात्मक सबूत द्वारा समर्थित नहीं है जो कि किसी भी व्यक्ति को होने वाली विशिष्ट बीमारियों के लिए उपचार प्रदान कर रहा है.

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Baba Ramdev again got a blow from the Supreme Court, now he will have to pay service tax of so many crores for the yoga camp.

Baba Ramdev, who is called Yoga Guru, has once again received a setback from the Supreme Court. Actually, Ramdev's 'Patanjali Yogpeeth Trust' organization will now have to pay service charges i.e. service tax. Because yoga camp has come under the purview of service tax. In this regard, the decision of the Service Tax Appellate Tribunal has been upheld by the bench of Justice Ujjwal Bhuiyan and Justice Abhay M OK of the Supreme Court. In which Patanjali Yogpeeth Trust was told that it is mandatory to pay service tax for organizing both non-residential and residential yoga camps.
 
 
Let us tell you, while organizing Ramdev's yoga camps, Patanjali Yogpeeth Trust charges entry fees from the people coming there. In this case, the bench of Supreme Court Justice Abhay M OK and Justice Ujjwal Bhuiyan, while giving its verdict, said that "Service Tax Appellate Tribunal has rightly said that after taking the entry fee, yoga in the camps is a service." . In such a situation, we do not see any reason to interfere with the order of the Tribunal. Therefore, the appeal of 'Patanjali Yogpeeth Trust' is dismissed.'' Along with this, the court refrained from intervening in the orders of the Allahabad bench of the Excise, Customs and Service Tax Appellate Tribunal dated October 5, 2023. Refused flatly.
 
Service tax of Rs 4.5 crore will have to be paid
The Commissioner of Central Excise and Customs, Meerut Range directed Yoga Guru Baba Ramdev's organization 'Patanjali Yogpeeth Trust' to pay around Rs 4.5 crore along with fine and interest for such camps organized between October 2006 and March 2011. Is. Patanjali Yogpeeth Trust had argued through these yoga camps that they were providing services which cure diseases and it was not taxable under the 'Health and Fitness Services' category. On this, the tribunal said that the claim is not supported by any positive evidence that it is providing treatment for specific diseases suffered by any person.