देश और दुनिया में चर्चा में हैं भगवान कृष्ण के सबसे नन्हें भक्त, 1 करोड़ की नौकरी छोड़ पिता भी भक्ति में लीन

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देश और दुनिया में चर्चा में हैं भगवान कृष्ण के सबसे नन्हें भक्त, 1 करोड़ की नौकरी छोड़ पिता भी भक्ति में लीन
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देश और दुनिया में चर्चा में हैं भगवान कृष्ण के सबसे नन्हें भक्त, 1 करोड़ की नौकरी छोड़ पिता भी भक्ति में लीन

आध्यात्मिकता की यह कहानी एक छोटे से गांव से निकलकर देश-विदेश में धूम मचा रही है। यह नन्हा भक्त, भागवत दास, जिसने अपने पिता की नौकरी छोड़कर धार्मिक साधना में लीन हो गया है, उसकी कहानी आपको हृदय से छू जाएगी। इस लेख में हम भागवत दास की यात्रा को समझेंगे, उनके परिवार और उनके धार्मिक अभियान को जानेंगे


भागवत दास का नाम हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं शहर से जुड़ा है। उनके पिता, श्री आदि, भगवद् गीता के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं और उन्होंने अपने बेटे को भी धार्मिक मूल्यों को समझाया है। भागवत दास का नाम और उनकी कहानी लोगों के बीच धार्मिकता के माध्यम से प्रसारित हो रहे हैं।


भागवत दास की यात्रा उनके परिवार के धार्मिक मूल्यों से शुरू होती है। उनके पिता ने अपनी नौकरी छोड़कर भगवान कृष्ण की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया है, और इस प्रेरणादायक कदम को भागवत दास ने भी अपनाया। उनकी इस यात्रा ने लोगों को धार्मिकता और सेवा के महत्व को समझाया है।


भागवत दास का परिवार भी धार्मिक मूल्यों को महत्वपूर्ण मानता है। उनके पिता, माता, और परिवार के अन्य सदस्य सभी गोवर्धन में रहते हैं और भगवान कृष्ण की सेवा में सक्रिय हैं। इस परिवार का संघटन लोगों को सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक धार्मिकता के माध्यम से जोड़ता है।


भागवत दास ने अपने धार्मिक अभियान के लिए सोशल मीडिया को सक्रिय रूप से उपयोग किया है। उनकी यात्रा और उनके कार्यों को लोगों के साथ साझा करके उन्होंने धार्मिकता के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा दिया है।

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The youngest devotee of Lord Krishna is in the news in the country and the world, his father also left his job worth Rs 1 crore and is engrossed in devotion.

This story of spirituality coming from a small village is making waves in the country and abroad. The story of this little devotee, Bhagwat Das, who has left his father's job and engaged in religious practice, will touch your heart. In this article we will understand the journey of Bhagwat Das, his family and his religious campaign.

Bhagwat Das: A Unique Story
The name of Bhagwat Das is associated with the town of Ghumarwin in Bilaspur district of Himachal Pradesh. His father, Shri Adi, is active in propagating the Bhagavad Gita and has imparted religious values to his son as well. The name of Bhagwat Das and his story are spreading among the people through religiosity.

journey of bhagwat das
Bhagwat Das's journey begins with the religious values of his family. His father left his job and dedicated his life to the service of Lord Krishna, and this inspirational step was also adopted by Bhagwat Das. His journey has made people understand the importance of righteousness and service.

Bhagwat Das's family
Bhagwat Das's family also considers religious values important. His father, mother, and other family members all live in Govardhan and are active in the service of Lord Krishna. This family organization connects people through social service and cultural religiosity.

Religious campaign of Bhagwat Das
Bhagwat Das has actively used social media for his religious campaign. By sharing his journey and his works with people he has promoted social change through religiosity.

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