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पुलिस द्वारा की गई बर्बरता का दूसरा खौफनाक सबूत भी सामने आ गया

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नोखा में दुकानदार के साथ पुलिस द्वारा की गई बर्बरता का दूसरा खौफनाक सबूत भी सामने आ गया है। सोमवार को हुई इस शर्मनाक घटना का वीडियो वायरल हुआ था। अब पीड़ित रामरतन जाखड़ को पुलिस द्वारा दिए गए जख्मों की तस्वीरें भी वायरल हो रही है। ज़ख़्म देखने वाला हर आम आदमी सहम उठा है। पता चला है कि बाजार में की गई मारपीट से ही पुलिस का मन नहीं भरा तो थाने ले जाकर रामरतन को जमकर पीटा। चौंकाने वाली बात यह है कि वीडियो में पुलिस की बर्बरता स्पष्ट होने के बावजूद आरोपी सीआई अरविंद सिंह शेखावत व सब इंस्पेक्टर रणवीर सिंह के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया है। एएसपी ग्रामीण सुनील कुमार से हमने सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि कोई एक्शन नहीं लिया गया है। जांच चल रही है।

वहीं दूसरी ओर रामरतन को न्याय दिलाने के लिए किसान लामबंद होने की तैयारी में है। पुलिस के इस शर्मनाक कृत्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं घटना के करीब 24 घंटे बाद भी जिला पुलिस द्वारा आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक्शन ना लेना भी सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी पुलिस कठघरे में नज़र आ रही है। आमजन का कहना है कि अब वह गलत कार्रवाई के खिलाफ सवाल खड़े नहीं कर सकता। ऐसा करने पर पुलिस बर्बरता करने के साथ साथ उन्हें मुकदमों में भी फंसा सकती है।

बता दें कि सोमवार करीब 11 बजे पुलिस ने रामरतन की दुकान का चालान काटा था। उस समय उसका भाई पवन दुकान पर था। उसने रामरतन को बुलाया। कहा जा रहा है कि रामरतन ने सीआई से गलत चालान की शिकायत की। दरअसल, रामरतन की दुकान कृषि यंत्रों की सर्विसिंग की दुकान है, लेकिन बाहर हार्डवेयर लिखा था। पुलिस ने चालान किया तो रामरतन ने अपना पक्ष रखा। पुलिस के ना मानने पर रामरतन ने अन्य खुली दुकानों के चालान करने को भी कहा। इस पर सीआई भड़क गए, अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया बताते हैं। यहीं से गहमागहमी बढ़ी। इस बीच सीआई हाथ उठाने व बचाने की जद्दोजहद शुरू हुई। बाद में सीआई ने उसे पकड़ा व सब इंस्पेक्टर ने लात घूसों से धुनाई की। बाद में दोनों भाईयों को पुलिस थाने ले गई। थाने में भी रामरतन के साथ बर्बरता की गई। राजकार्य में बाधा का मुकदमा करने की तैयारी थी, ख़बरें चली तो इरादा टाल दिया। बाद में दुकानदार को क्वॉरन्टाइन करते हुए महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस की यह बर्बरता सवाल खड़े करती है। पुलिस का काम कानून पालना करवाना व आमजन को सुरक्षा प्रदान करना है, इसके उल्टे वह बर्बरता करती नज़र आई। ऐसे में आम आदमी कहां जाएगा। क्या ग़लत के खिलाफ उठने वाली आवाजों पर पुलिस इसी तरह से असंवैधानिक कृत्य करेगी? घटना बेहद संवेदनशील है। अमानवीय भी है।

अब देखना यह है कि आला अफसर इस मामले को लेकर आरोपी पुलिस अधिकारियों को अभय देते हैं या उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हैं। हम आपके साथ रामरतन के जख्मों वाली तस्वीरें भी साझा कर रहे हैं। देखें तस्वीरें

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