Home बीकानेर पशुपालन के क्षेत्र में मूल्य संवर्धन उत्पाद व प्रसंस्करण समय की आवश्यकत

पशुपालन के क्षेत्र में मूल्य संवर्धन उत्पाद व प्रसंस्करण समय की आवश्यकत

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राजुवास के वैज्ञानिकों और नाबार्ड के जिला प्रबंधकों की
बैठक में पशुपालन व ग्रामीण विकास पर हुई चर्चा

बीकानेर, 12 फरवरी। पशुपालन और ग्रामीण विकास विषय पर वेटरनरी विश्वविद्यालय में नाबार्ड के महाप्रबंधक सहित राज्य के जिला विकास प्रबंधकों के साथ राजुवास और केन्द्रीय अनुसंधान संस्थाओं के वैज्ञानिकों की संरचनात्मक बैठक और परिचर्चा शुक्रवार को आयोजित की गई। राजुवास के सामाजिक विकास एवं सहभागिता प्रकोष्ठ और नाबार्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बैठक की अध्यक्षता वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने की। बैठक में राज्य के पशुपालक और किसानों के हित में किए अनुसंधान और पशुपालन के सुद्दढीकरण के लिए नाबार्ड योजनाओं से जोड़ने और उनकी आय में वृद्धि किए जाने के उपायों पर परिचर्चा की गई। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने कहा कि वेटरनरी विश्वविद्यालय के पशुधन अनुसंधान केन्द्रों और पशु विज्ञान केन्द्रों का नेटवर्क पूरे राज्य में है

जहां पशुपालकों को पशुपालन तकनीकों का हस्तांतरण, उन्नत पशुपालन के प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने के कार्य किए जा रहे हंै। नाबार्ड पशुपालकों और विद्यार्थियों के लिए डेयरी, भेड़ और बकरी पालन के बहु उपयोगी सेक्टर में क्षमता संवर्द्धन कर उद्यमिता विकास के कार्यों को आगे बढ़ाने का महŸाी कार्य कर सकती है। विश्वविद्यालय डेयरी प्रसंस्करण में उद्यमिता और डेयरी तकनीक से समद्ध पाठ्यक्रम शुरू करना चाहता है। इससे पशुपालक स्वरोजगार की ओर प्रेषित हो सकेंगे। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के मुख्य महाप्रबंधक जयदीप श्रीवास्तव ने कहा कि नाबार्ड वेटरनरी विश्वविद्यालय और बीकानेर में स्थित ऊंट, भेड़ एवं ऊन और अश्व अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर पशुपालन अनुसंधानों को राज्य के किसानों और पशुपालकों तक पंहुचाकर आय वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए युवाओं को आकर्षित करना चाहती है।

कृषि के बदलते परिवेश में किसान और पशुपालकों की समृद्धि के लिए कृषि-पशुपालन के एकीकृत माॅडल की जरूरत है। नाबार्ड का उद्देश्य छोटे किसानों-युवाओं को खेती-बाड़ी के साथ-साथ पशुपालन कार्यों से जोड़ना है।

पशुपालन से उनकी आय में 20 से 30 प्रतिशत वृद्धि की जा सकती है। परिचर्चा में राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डाॅ. ए. साहू. राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र के प्रभागाध्यक्ष डाॅ. एस.सी. मेहता और केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, बीकानेर के प्रमुख डाॅ. एच.के. नरूला ने ऊंट, भेड़ व घोडे़ पर अनुसंधान कार्यों की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। राजुवास के मानव संसाधन विकास निदेशक प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने अपने सुझाव दिए। आयोजन सचिव प्रो. राजेश कुमार धूड़िया प्रसार शिक्षा निदेशक ने पशुपालन और ग्रामीण विकास की संरचनात्मक बैठक के महत्व और उपयोगिता पर प्रकाश डाला। परिचर्चा में नाबार्ड के महाप्रबंधक कुलदीप सिंह और टी. वैंकट कृष्ण, उप महाप्रबंधक इन्दू राठौरिया ने भी विचार व्यक्त किए। राजुवास आई.यू.एम.एस. के प्रभारी डाॅ. अशोक डांगी ने वेटरनरी विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर प्रजेन्टेशन प्रस्तुत किया। इस अवसर अतिथियों ने राजुवास के “पशुपालक नए आयाम” के नवीन अंक का विमोचन किया। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक रमेश ताम्बिया ने सभी का आभार जताया। बैठक में राज्य के 22 नाबार्ड जिला प्रबंधकों सहित राजुवास के अधिष्ठाता स्नातकोŸार शिक्षा प्रो. जी.एन. पुरोहित, निदेशक क्लिनिक प्रो. ए.पी. सिंह और परीक्षा नियंत्रक प्रो. उर्मिला पानू, डाॅ. प्रवीण बिश्नोई सहित अन्य फैकल्टी सदस्य उपस्थित थे।

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