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हाईकोर्ट में फिर टली मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई, 24 फरवरी को अगली हियरिंग

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जोधपुर. रॉबर्ट वाड्रा (Robert Vadra) से जुड़े मामले में मंगलवार को भी हाईकोर्ट में समय अभाव के चलते सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाई. अब इस मामले में 24 फरवरी को फिर सुनवाई होगी. बीकानेर (Bikaner) के कोलायत फायरिंग रेंज में जमीन घोटाले तथा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी कंपनी स्काईलाइट प्राइवेट हॉस्पिटैलिटी तथा बिचौलिए महेश नागर की ओर से पेश की गई याचिका पर आज राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी की कोर्ट में सुनवाई होनी थी. लेकिन समय अभाव के चलते मामले में सुनवाई नहीं हो पाई. राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) मुख्यपीठ जोधपुर में जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी की कोर्ट में रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां मौरीन वाड्रा से जुड़े मामले पर सुनवाई होनी थी. जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले को लेकर बिचौलिए महेश नागर व स्काईलाइट होस्पिटिलिटी की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय में विविध आपराधिक याचिका 482 पेश की गई थी.

इससे पहले सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले में आरोपियों को आंशिक राहत प्रदान करते हुए नो कोर्सिव एक्शन यानी की गिरफ्तारी पर रोक के आदेश दिए थे. इस याचिका में ईडी की ओर से एएसजी राजदीपक रस्तोगी ने पूर्व में एक अर्जी कोर्ट के समक्ष पेश कर आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता बताते हुए कोर्ट से इजाजत मांगी थी. मंगलवार को राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी की कोर्ट में इस इन दोनों याचिकाओं की सुनवाई होनी थी.
बीकानेर के कोलायत क्षेत्र में जमीन खरीद से जुड़ा है मामला

रोबर्ट वाड्रा और उनकी मां मौरीन वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट प्राइवेट हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड ने साल 2012 में बीकानेर के कोलायत क्षेत्र में दलाल महेश नागर के जरिए 270 बीघा जमीन 79 लाख रुपये में खरीदी. बीकानेर के कोलायत में भारतीय सेना की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के लिए यह जमीन आवंटित की गई थी. इस जमीन से विस्थापित हुए लोगों के लिए दूसरी जगह पर 1400 बीघा जमीन आवंटित की गई थी. लेकिन इस जमीन के फर्जी कागजात तैयार करवाकर वाड्रा की कंपनी को बेच दिए. जबकि सेना से सम्बंधित इस क्षेत्र की जमीन को बेचा नहीं जा सकता था. वाड्रा की कंपनी ने क्षेत्र के गांवों में और जमीन खरीदने का प्रयास किया, लेकिन मामला आगे बढ़ नहीं पाया. फर्जी तरीके से जमीन के बेचने का मामला उजागर होने से पूर्व ही वाड्रा की कंपनी ने इस जमीन को पांच करोड़ रुपये में आगे बेच दिया. मनी लांड्रिंग से जुड़े इस मामले की ईडी ने जांच शुरू की थी. ईडी की पूछताछ से बचने के लिए वाड्रा लंबे अरसे से प्रयास करते रहे. इसके बाद हाईकोर्ट ने वाड्रा और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए वाड्रा को ईडी के समक्ष पेश होकर जांच में सहयोग करने के आदेश दिए थे. इसके बाद वाड्रा जयपुर में ईडी के समक्ष पेश भी हुए थे.

अब ईडी वाड्रा को हिरासत में लेकर करना चाहती है पूछताछ

इस मामले में एक बार फिर ईडी वाड्रा से पूछताछ करना चाहती है, लेकिन इस बार पूछताछ हिरासत में लेकर करना चाहती है. इसको लेकर ईडी की तरफ से एएसजी राजदीपक रस्तोगी ने राजस्थान उच्च न्यायालय में विचाराधीन दोनों याचिकाओं में अर्जी पेश कर कोर्ट से आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता बताते हुए हिरासत में लेने की इजाजत मांगी है.

जहां ईडी की ओर से एएसजी राजदीपक रस्तोगी और एएएसजी बीपी बोहरा पक्ष पैरवी कर रहे हैं, वहीं वाड्रा की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी, कुलदीप माथुर, वरुण सिंघवी और अभिषेक मेहता पैरवी कर रहे हैं.

 

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