बीकानेर। कोरोना के बाद दूसरी महामारी के रूप में उभरे ब्लैक फंगस को लेकर नया खतरा खड़ा हो गया है। नाॅन कोविड भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बीकानेर शहर के एक निजी हॉस्पिटल में तीन नाॅन कोविड मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। उनमें से एक डायबिटिक है, जबकि दो अन्य सामान्य रोगी हैं। इन दोनों मरीजों को साइनोसाइटिस की शिकायत थी।

तीनों रोगियों की एमआरआई व अन्य जांचों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। तीनों को इलाज के लिए जयपुर जाने के लिए कहा गया है। दो मरीज चूरू जिले के रतनगढ़ और सरदारशहर के हैं। बंगलानगर निवासी 62 साल की महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है। उनके बेटे ओमप्रकाश ने बताया कि मां को दोनों आंखों से दिखाई देना बंद हो गया है। आंखों में सूजन है। उन्हें कोरोना नहीं हुआ था।
पीबीएम इलाज के लिए इसलिए नहीं गए क्योंकि वहां कोरोना के मरीज भरे पड़े हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल में दिखाया था। डॉक्टर ने जयपुर ले जाने के लिए कहा है। इन्हें मिलाकर ब्लैक फंगस के पांच दिन में 15 मरीज सामने आ चुके हैं, लेकिन यहां इलाज नहीं मिलने से मरीजों को जयपुर भेजा जा रहा है।
सस्पेक्टेड मानते हुए चार मरीज ही पीबीएम हॉस्पिटल में भर्ती किए गए हैं। उनकी जांच रिपोर्ट्स का इंतजार हो रहा है। हालांकि क्लीनिकल आधार पर डॉक्टर्स ब्लैक फंगस मान रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट आने पर ही आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।

4 सस्पेक्टेड पीबीएम में भर्ती, लेकिन इंजेक्शन नहीं

नाॅन कोविड के ब्लैक फंगस का कारण: अन कंट्रोल डायबिटीज, एस्टेरॉयड का ज्यादा सेवन, साइनोसाइटिस इंफेक्शन, इम्युनिटी सिस्टम कमजोर, पोस्ट कोविड सिम्टम्स।

बचाव ऐसे करें: शुगर कंट्रोल रखना जरूरी। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। मास्क पहनें और रोजाना बदलें। साइनोसाइटिस में लापरवाही नहीं बरतें। तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। पोस्ट कोविड पेशेंट को अलर्ट रहना जरूरी, क्योंकि सबसे ज्याद केस इन्हीं के आ रहे हैं।

ब्लैक फंगस का एक इंजेक्शन 7 हजार का, एक मरीज को 45 डोज लगती है, बाजार से लाइपोसोमल एंफोटेरिसिन बी गायब: ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाले इंजेक्शन लाइपोसोमल एंफोटेरिसिन बी की बाजार में कीमत साढ़े छह से सात हजार के बीच है। एक मरीज के करीब 45 डोज लगती है। इसके साथ दूसरी दवाएं भी लेनी होती हैं। डेढ़ महीने इलाज चलता है। फिलहाल ये इंजेक्शन बाजार में कहीं नहीं मिल रहा है।

इलाज के लिए स्पेशलिस्ट की कमेटी, पीबीएम में अलग से वार्ड बनाया
ब्लैक फंगस महामारी घोषित होने के बाद पीबीएम प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। ईएनटी, आई, डेंटल, मेडिसिन, एंडोक्रायोनोलॉजिस्ट, माइक्रो बायोलॉजी, एनेस्थिटिक विशेषज्ञों की कमेटी बनाई गई है। ये कमेटी प्रतिदिन के मरीजों की रिपोर्ट पीएसएम विभाग को भेजेगी, जहां से राज्य सरकार के पास सूचना भेजी जाएगी।
मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. मुकेश आर्च ने शनिवार को डॉक्टरों के साथ मीटिंग कर जिम्मेदारियां तय की। उधर, ब्लैक फंगस के मरीजों को भर्ती करने के लिए गायनी डिपार्टमेंट का पी वार्ड खाली कराया गया है। चूंकि मेडिसिन और सर्जरी विभाग के सभी वार्डों में कोरोना के मरीज भर्ती हैं। उनके साथ ब्लैक फंगस वाले मरीजों को नहीं रखा जा सकता है।
राज्य सरकार को 150 इंजेक्शन की डिमांड भेजी
ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों का उपचार करने के लिए पीबीएम से 150 लाइपोसोमल एंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन की डिमांड राज्य सरकार को भेजी गई है। बताया जाता है कि सरकार को करीब 2500 इंजेक्शन केंद्र से मिले हैं। उनमें से सभी जिलों में वायल भेजे जाएंगे। बीकानेर में अभी यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। उधर, पीबीएम के ईएनटी में रोजाना 10 से 15 रोगी साइनोसाइटिस के आ रहे हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि ब्लैक फंगस के सिम्टम्स बहुत कम रोगियों में मिले हैं।

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