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छत्रपति शिवाजी: मुगल साम्राज्‍य की कमर तोड़ने वाला योद्धा, क्‍यों कहते हैं इंडियन नेवी का पितामह

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छत्रपति शिवाजी, मराठा साम्राज्‍य के वो योद्धा जिनके आगे कोई टिक नहीं सका. छत्रपति शिवाजी को देश के सबसे उन्‍नतशील और विवेकशील शासकों में गिना जाता है. 19 फरवरी 1630 को उनका जन्‍म प्रतिष्ठित शिवनेरी किले में हुआ और 3 अप्रैल 1680 को उन्‍होंने रायगढ़ के किले में आखिरी सांस ली थी. शिवाजी को बचपन से ही योद्धा के तौर पर गिना जाता था. उनकी सिर्फ 15 साल थी जब उन्‍होंने बीजापुर के कमांडर इनायत खान को मजबूर कर दिया था कि वो उन्‍हें तोरण का किला सौंप दे. शिवाजी युद्ध की रणनीतियों के महारथी थे और आप में से कम ही लोगों को मालूम होगा कि उन्‍हें इंडियन नेवी का ‘पितामह’ भी कहा जाता है.

पहला जहाज 1654 में हुआ तैयार

समुद्र पर दुश्‍मनों के दांत खट्टे करती नौसेना की जो ताकत आज आप देखते हैं, उसकी परिकल्‍पना का श्रेय शिवाजी को ही जाता है. शिवाजी मराठा मिलिट्री फोर्सेज के तहत आने वाली नौसेना को शुरू करने वाले पहले व्‍यक्ति थे. शिवाजी के दौर में मराठा शासन ने 1674 में नेवी फोर्स को स्‍थापित करने का काम किया था. शिवाजी को इस आधारशिला को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है. छत्रपति शिवाजी ने कोंकण और गोवा में समंदर की रक्षा के लिए एक मजबूत नेवी की स्‍थापना की. शिवाजी इस हिस्‍से को अरब, पुर्तगाली, ब्रिटिश और समुद्री लुटेरों से बचाना चाहते थे. इसके लिए उन्‍होंने भिवंडी, कल्‍याण और पनवेल में लड़ाई के लिए जहाज तैयार करवाए थे.

बताई नेवी की अहमियत

इतिहासकार जादूनाथ सरकार ने लिखा है, ‘मध्‍यकालीन दौर में जब मुगल भारत में आए तो उन्‍होंने मिलिट्री की नौसैनिक बल की क्षमताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया था. ऐसा इसलिए था क्‍योंकि वो शासक उत्‍तरी क्षेत्र से होते हुए आगे बढ़े थे जहां पर उन्‍होंने जमीन पर कई लड़ाईयां आसानी से जीत ली थीं. लेकिन जब पुर्तगाली भारत में आए तो उन्‍होंने पश्चिमी क्षेत्र पर अपना प्रभुत्‍व कायम करने की कोशिशें की.’

उन्‍होंने आगे लिखा, ‘वो यहां पर व्‍यापार को नियंत्रित करना चाहते थे और उस पर अपना अधिकार चाहते थे. यह छत्रपति शिवाजी महाराज ही थे जिन्‍होंने एक मजबूत नेवी की अहमियत पर बल दिया. इसकी वजह से उन्‍होंने पहले मराठा जहाज का निर्माण किया. इसे कल्‍याण के करीब सन् 1654 में तैयार किया गया था.’

शिवाजी के पास 500 जहाज

सन् 1657-58 तक शिवाजी ने कई जहाजों का निर्माण कराया. शिवाजी ने प्रशिक्षित लोगों को इसका काम सौंपा और 20 वॉरशिप्‍स तैयार करवाई थीं. शिवाजी ने जंजीरा कोस्‍ट लाइन पर सिद्दीस के खिलाफ कई लड़ाईयां लड़ीं.

शिवाजी के प्रशासन में रहे कृष्‍णजी अनंत सभासद ने लिखा था कि शिवाजी के बेड़े में दो स्‍क्‍वाड्रन थीं. हर स्‍क्‍वाड्रन में 200 जहाज थे और सब अलग-अलग क्‍लास के थे. शिवाजी के सचिव रहे मल्‍हारा राव चिटनिस के मुताबिक यह संख्या 400 से 500 थी.

शिवाजी की नेवी में 5000 नौसैनिक

कहते हैं सन् 1674 में छत्रपति शिवाजी महाराज की वजह से गोवा में पुर्तगालियों को मराठा नौसेना की ताकत का अहसास हो सका था. इसके बाद उन्‍होंने छत्रपति शिवाजी के पास कुछ तोहफों के साथ एक दूत भेजा था. इसके बाद दोनों के बीच दोस्‍ती का एक समझौता हुआ.

इस समय मराठा नेवी के पास करीब 5,000 नौसैनिक और 57 वॉरशिप्‍स थीं. इसके बाद कारवार तक मराठा नेवी ने अपना विस्‍तार किया. यह जगह आज कर्नाटक में है और इंडियन नेवी का अहम बेस है. यहां पर नेवी के पास करीब 85 वॉरबोट थीं जिनका वजन करीब 30 से 150 टन था.

160 जहाजों के साथ एक फ्लीट

इंग्लिश, डच, पुर्तगाली और डच ने भी मराठा शिप्‍स का जिक्र किया है लेकिन इनकी संख्‍या कितनी थी यह नहीं बताया. कहा जाता है कि शिवाजी की फ्लीट में 160 से 700 तक व्‍यापारी थे. फरवरी 1665 में शिवाजी ने खुद बसरूर में अपनी सेना को जोड़ा.

इंग्लिश फैक्‍ट्री रिकॉर्ड के मुताबिक शिवाजी की सेना में 85 फ्रिगेट यानी लड़ाई के लिए एक छोटा जहाज और तीन बड़े जहाज थे. नवंबर 1670 में कोलाबा जिले में नंदगांव में 160 जहाजों को इकट्ठा करके एक फ्लीट तैयार की गई. दरिया सांरग इस फ्लीट के एडमिरल थे.

मुसलमानों को दी बड़ी जिम्‍मेदारियां

शिवाजी की तैयार की हुई नौसेना में कई मुसलमान सैनिक भी थे. इब्राहीम और दौलत खान इनमें सबसे खास थे. दोनों ही अफ्रीकी मूल के थे और शिवाजी ने दोनों को ही बड़ी भूमिकाएं दी हुई थीं. सिद्दी इब्राहीम आर्टिलरी के प्रमुख थे. सन् 1680 से 1689 तक संभाजी महाराज के काल में मराठा नेवी ने कई लड़ाईयां लड़ी थीं. मानक भंडारी, दारिया सारंग और दौलत खान मराठा नेवी का बड़ा हिस्‍सा थे.

मॉर्डन नेवी मराठा नेवी का ही हिस्‍सा

आज की मॉर्डन इंडियन नेवी को उसी नेवी का हिस्‍सा माना जाता है जिसकी स्‍थापना मराठाओं ने की और फिर शिवाजी ने इसे विस्‍तार दिया. इसी वजह से शिवाजी को ‘फादर ऑफ इंडियन नेवी’ कहते हैं.

शिवाजी के नाम पर प्रशासनिक क्षमताओं का शाही इतिहास दर्ज है. उन्‍हें ऐसी रणनीतियों के लिए आज तक लोग याद रखते हैं जिन्‍होंने मुगल साम्राज्‍य की नींव को कमजोर करने में मजबूत भूमिका अदा की थी.

छत्रपति शिवाजी अक्‍सर अपने सैनिकों को कहते थे कि पहले छोटे-छोटे लक्ष्‍य के साथ जीत की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए. तभी आगे चलकर बड़ी विजय हासिल हो सकेगी.

औरंगजेब तक को हराया

25 जुलाई 1648 को उनके पिता शाहजी को बीजापुर के शासक मोहम्मद आदिलशाह ने शिवाजी को नियंत्रित करने का आदेश दिया. इस आदेश पर उन्‍हें बाजी घोरपडे ने कैद कर लिया था. सन् 1649 में जब शिवाजी ने दिल्ली में सहजान बादशाह से संपर्क किया तो उनके पिता शाहजी को छोड़ा गया. कहा जाता है कि सन् 1649 से 1655 तक शिवाजी ने अपने विजय अभियान में भाग लिया और मुगल साम्राज्‍य की कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्‍होंन आदिलशाह से लेकर औरंगजेब तक को हराया था.

बुखार की वजह से मृत्‍यु

मार्च 1680 में हनुमान जयंती के मौके पर शिवाजी को बुखार और पेचिश की बीमारी हो गई. उनकी उम्र उस समय बस 52 साल थी. 3 अप्रैल 1680 को उन्‍होंने रायगढ़ के किले में दम तोड़ दिया. पुतलाबाई तो शिवाजी की जीवित पत्नियों में से सबसे बड़ी थीं, वो उनकी मृत्‍यु के बाद सती हो गई थी. 21 अप्रैल 1680 को 10 साल के राजा राम को सिंहासन पर स्थापित किया गया. संभाजी ने सेनापति को मारने के बाद रायगढ़ किले पर कब्जा कर लिया और उसी साल 18 जून को रायगढ़ का नियंत्रण हासिल किया.

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