कोचिंग सिटी में कई सालों में ऐसा पहली बार, टीचर से लेकर बिजनेसमैन तक डरे...

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कोचिंग सिटी में कई सालों में ऐसा पहली बार, टीचर से लेकर बिजनेसमैन तक डरे...

कोचिंग सिटी में कई सालों में ऐसा पहली बार, टीचर से लेकर बिजनेसमैन तक डरे...

कोचिंग सिटी कोटा में इस बार जो हो रहा है वह इससे पहले कभी नहीं हुआ। कोटा में उल्टी गंगा बह रही है और मामला प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गया है। हॉस्टल और पीजी के मालिकों और लीज होल्डर्स का विवाद बढ़ रहा है। विवाद का असली कारण वही बच्चे हैं जो हर साल कोटा में आते हैं। लेकिन इस बार कोटा में बच्चों की संख्या कम होने के कारण लीज वालों और प्रॉपर्टी मालिकों के बीच विवाद गहरा रहा है।

कोटा में बच्चों से 200 करोड़ की आय
दरअसल कोटा में हर साल करीब दो साल बच्चे कोचिंग के लिए आते हैं। कोचिंग, पीजी, रहना, खाना - पीना मिलाकर हर बच्चे के करीब बारह से पंद्रह हजार रूपए खर्च होते हैं। ऐसे में हर महीने करीब दो सौ पचास से तीन सौ करोड़ का रेवेन्यू वहां जनरेट होता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से हर साल कोटा में कोचिंग करने वाले बच्चों के सुसाइड मामले बढ़ने के कारण इस बार परिवार अपने बच्चों को कोटा भेजने से कतरा रहे हैं।

कोटा की  घटनाओं से डरे कोचिंग और रहवासी
कोटा में एक लीज होल्डर सुमित का कहना है कि मैने एक मकान मालिक से उनकी तीन मंजिल की प्रॉपर्टी तीन साल के लिए लीज पर ली थी। हर साल उनको दो से ढाई लाख रूपए का किराया दे रहा था, लेकिन इस बार बच्चे कम होने के कारण किराया ही नहीं निकल पा रहा है। मेरी खुद की कमाई तो बहुत दूर की बात है। कोटा में इसी तरह से हजारों लोगों ने लोकल प्रॉपर्टी को लीज पर लेकर उसे पीजी या हॉस्टल में तब्दील किया है। लेकिन इस बार विवाद हो रहा है।

This is the first time in many years that something like this has happened in coaching city Kota, from teachers to businessmen are scared...

What is happening this time in coaching city Kota has never happened before. Things are going wrong in Kota and the matter has reached the administrative officials. The dispute between the owners and lease holders of hostels and PGs is increasing. The real reason for the dispute is the same children who come to Kota every year. But this time due to less number of children in Kota, the dispute between lease holders and property owners is deepening.

Income of 200 crores from children in Kota

Actually, about two children come to Kota for coaching every year. Including coaching, PG, accommodation, food and drink, every child spends about twelve to fifteen thousand rupees. In such a situation, a revenue of about two hundred fifty to three hundred crores is generated there every month. But due to the increase in suicide cases of children taking coaching in Kota every year for the last few years, this time families are hesitant to send their children to Kota.

Coaching and residents scared of Kota incidents
Sumit, a lease holder in Kota, says that I had taken a landlord's three-storey property on lease for three years. I was paying him two to two and a half lakh rupees as rent every year, but this time due to fewer children, I am not able to pay the rent. My own earnings are far away. Similarly, thousands of people in Kota have leased local properties and converted them into PG or hostel. But this time there is a controversy.