बेटी की इच्छा को पिता ने किया पूरा, पहली बार मुस्लिम समुदाय की बेटियों की निकली बिंदौरी

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बेटी की इच्छा को पिता ने किया पूरा, पहली बार मुस्लिम समुदाय की बेटियों की निकली बिंदौरी

बेटी की इच्छा को पिता ने किया पूरा, पहली बार मुस्लिम समुदाय की बेटियों की निकली बिंदौरी

राजस्थान में बेटियों को बेटों के बराबर दर्जा देने के लिए अब शादियों में दुल्हनों को घोड़ी पर बैठाने की एक परंपरा शुरू हो गई है. लेकिन यह बदलाव की बयार अब ना केवल हिंदू परिवारों में, बल्कि मुस्लिम परिवारों में भी देखने को मिल रही है. झुंझुनूं शहर में पहली बार मुस्लिम बेटियों को निकाह से पहले घोड़ी पर बैठाकर बिंदौरी निकाली गई. इस बदलाव की बयार का अगुवा झुंझुनूं शहर का निर्बाण परिवार बना है.

बेटियों को बैठाया घोड़ी पर, पहनाया सेहरा
दरअसल झुंझुनूं के निर्बाण प​रिवार के इशाक निर्बाण की बेटी शबनम और फारूक निर्बाण की बेटी मुस्कान का आज निकाह होगा. रात को मुस्कान के लिए कॉपर और शबनम के लिए झुंझुनूं शहर से बारात आएगी. लेकिन मुस्कान और शबनम की इच्छा पर उनके परिवार के सदस्य फारूक निर्बाण, इदरीश निर्बाण और बिलाल मुंदोरी उन्हें घोड़ी पर बैठाकर बिंदौरी निकाली. इसके लिए बाकायदा डीजे भी मंगवाया गया. वहीं शादी के जोड़े से पहले दोनों बेटियों के सिर पर सेहरा भी सजाया गया.

मुस्कान और शबनम ने जताई खुशी
डीजे की धुन पर महिलाओं ने जमकर डांस किया और खुशी मनाई. इस खुशी के मौके पर मुस्लिम बेटियां मुस्कान और शबनम खुद को रोक नहीं पाई और उन्होंने भी डांस किया. निर्बाण परिवार के मुखिया फारूक निर्बाण ने बताया कि उन्हें उनकी बेटियां मुस्कान और शबनम ने जब बताया कि वह हिंदू परिवार की लड़कियों की तरह शादी से पहले घोड़ी पर बैठना चाहती है. तो उन्होंने इसके लिए मना नहीं किया. बेटियों के सिर पर सेहरा सजाकर डीजे के साथ घोड़ी पर बैठाकर बिंदौरी निकाली गई. जिससे ना केवल बेटियां, बल्कि परिवार की सभी महिलाएं भी काफी खुश नजर आई. 

बेटियों को घोड़ी पर बैठाकर बिंदौरी निकालने का ट्रेंड
बेटी मुस्कान ने बताया कि निकाह से पहले उन्हें काफी मन था कि वे भी घोड़ी पर बैठे. यह सपना उनके पिता फारूक निर्बाण, चाचा इदरीश निर्बाण और बिलाल मुंदोरी ने पूरा किया है. जिसको शब्दों में बयां किया जाना मुश्किल है. आपको बता दें कि शादियों के सीजन में आज शेखावाटी के हर गांव, ढाणी और कस्बों में शादी से पहले बेटियों को घोड़ी पर बैठाकर बिंदौरी निकालने का ट्रेंड बन गया है. अब इस बदलाव और ट्रेंड की शुरूआत मुस्लिम परिवारों में भी हो गई है. जो बेटियों को सशक्त बनाने के लिए बड़ा कदम माना जा सकता है.

Father fulfilled daughter's wish, for the first time daughters of Muslim community came out with Bindauri.

In order to give equal status to daughters as sons, a tradition of making brides sit on horses in weddings has started in Rajasthan. But this wind of change is now being seen not only in Hindu families but also in Muslim families. For the first time in Jhunjhunu city, Muslim daughters were taken out for Bindauri by sitting on horses before their marriage. The Nirban family of Jhunjhunu city has become the leader of this wind of change.

Made the daughters sit on the mare, made them wear 'Sehra'
Actually, Shabnam, daughter of Ishaq Nirban of Jhunjhunu's Nirban family and Muskaan, daughter of Farooq Nirban will get married today. At night, a procession will come from Jhunjhunu city for Copper and Shabnam for Muskaan. But on the wish of Muskaan and Shabnam, their family members Farooq Nirban, Idris Nirban and Bilal Mundori took them out on a mare to Bindauri. A DJ was also called for this. Before the wedding, Sehra was also decorated on the heads of both the daughters.

Muskaan and Shabnam expressed happiness
The women danced vigorously to the tunes of the DJ and celebrated. On this happy occasion, Muslim daughters Muskaan and Shabnam could not stop themselves and they also danced. Farooq Nirban, the head of the Nirban family, told that when his daughters Muskaan and Shabnam told him that they wanted to sit on a mare before marriage like the girls of Hindu families. So he did not refuse for this. Bindauri was taken out after decorating the heads of the daughters and making them sit on a mare along with the DJ. Due to which not only the daughters, but all the women in the family also looked very happy. 

Trend of taking out Bindouri by making daughters sit on mare
Daughter Muskaan told that before the marriage, he was very keen to sit on a mare. This dream has been fulfilled by his father Farooq Nirban, uncle Idris Nirban and Bilal Mundori. Which is difficult to explain in words. Let us tell you that today during the wedding season, it has become a trend in every village, Dhani and town of Shekhawati to make the daughters sit on a mare and take out Bindauri before marriage. Now this change and trend has started in Muslim families also. Which can be considered a big step towards empowering daughters.