लकड़ी के कारखाने में रातोंरात लपटें, 10 लाख की लकड़ी जलकर राख

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लकड़ी के कारखाने में रातोंरात लपटें, 10 लाख की लकड़ी जलकर राख
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श्रीडूंगरगढ़ में भीषण आग: लकड़ी के कारखाने में रातोंरात लपटें, 10 लाख की लकड़ी जलकर राख

श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के मोमासर गांव में देर रात एक लकड़ी के कारखाने में अचानक भीषण आग भड़क उठी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेज और अचानक लगी कि कुछ ही मिनटों में लकड़ी के ढेर धू-धू कर जलने लगे और लपटें आसमान तक उठती दिखाई दीं। इस अग्निकांड में लगभग 10 लाख रुपये मूल्य की लकड़ी जलकर राख होने का अनुमान है।

मिली जानकारी के अनुसार यह कारखाना सीताराम पुत्र कानाराम सुथार के घर परिसर में संचालित होता था। बताया जा रहा है कि रात के समय अचानक धुआं उठने पर पड़ोसियों ने शोर मचाया। लोग मौके पर दौड़े तो देखा कि लकड़ी के भंडार से आग की तेज़ लपटें निकल रही थीं। ग्रामीणों ने तुरंत बाल्टियों और पाइपों से पानी डालकर आग को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन लपटें इतनी फैल चुकी थीं कि उन्हें बुझाना मुश्किल हो गया।

सूचना पर श्रीडूंगरगढ़ नगर पालिका की फायर ब्रिगेड टीम दमकल वाहन के साथ मौके पर पहुँची। दमकल कर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई और कोई जनहानि नहीं हुई।

आग का कारण – शॉर्ट सर्किट की आशंका

प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। कारखाने में बड़ी मात्रा में सूखी लकड़ी मौजूद होने से आग ने तेजी पकड़ी और कुछ ही समय में पूरा स्टोर चपेट में आ गया। फायर टीम के अनुसार यदि समय पर सूचना नहीं मिलती तो आग पास की अन्य बस्तियों तक फैल सकती थी, जिससे बड़ा नुकसान संभव था।

स्थानीय लोगों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

ग्रामवासियों की त्वरित प्रतिक्रिया और दमकल की समय पर पहुंच ने नुकसान को सीमित किया। लोग देर रात तक मौके पर मौजूद रहे ताकि आग दोबारा भड़क न सके।

ग्रामीणों ने प्रशासन से इलेक्ट्रिक वायरिंग की जांच, कारखानों में अग्निशमन उपकरण अनिवार्य, और ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त दमकल व्यवस्था की मांग की है।

मोमासर गांव में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। व्यापारियों ने भी चिंता जताई कि सूखी लकड़ी और मशीनों वाले कारखाने में सुरक्षा के उपाय मजबूत होने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।