संस्था का नाम बिना अनुमति इस्तेमाल करने पर क्या करें? जानिए कानूनी कार्रवाई के पूरे विकल्प

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संस्था का नाम बिना अनुमति इस्तेमाल करने पर क्या करें? जानिए  कानूनी कार्रवाई के पूरे विकल्प
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आज कई सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक संस्थाओं में यह सवाल उठता है कि अगर कोई अध्यक्ष संस्था का नाम, पदनाम या पहचान बिना अनुमति के इस्तेमाल कर रहा है, तो संस्था क्या कर सकती है। संस्था का नाम बिना अनुमति इस्तेमाल करना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कई मामलों में यह कानूनी अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अध्यक्ष पद का मतलब संस्था का मालिक होना नहीं होता। संस्था का नाम, उसकी पहचान और प्रतिष्ठा पूरी कार्यकारिणी और सदस्यों की सामूहिक संपत्ति होती है। इसलिए बिना अनुमति नाम का उपयोग संस्था के नियमों का उल्लंघन माना जाता है।

पहला कदम: लिखित आपत्ति

अगर संस्था का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, तो संस्था की ओर से उसे एक लिखित नोटिस या आपत्ति पत्र दिया जाना चाहिए। इस पत्र में साफ लिखा जाए कि

  • संस्था का नाम या लेटरहेड बिना अनुमति उपयोग किया गया है
  • कार्यकारिणी की अनुमति के बिना ऐसा करना गलत है
  • भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी दी जाती है
  • यह कदम आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी आधार तैयार करता है।
  • दूसरा कदम: संस्था के नियम और बायलॉज
  • लगभग हर रजिस्टर्ड संस्था के संविधान या बायलॉज में यह स्पष्ट होता है कि

अध्यक्ष अकेले निर्णय नहीं ले सकता

संस्था के नाम का उपयोग केवल कार्यकारिणी या बोर्ड की अनुमति से होगा यदि इन नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो संस्था का नाम बिना अनुमति इस्तेमाल करने का मामला और मजबूत हो जाता है।

तीसरा कदम: कार्यकारिणी की बैठक

  • इसके बाद कार्यकारिणी की बैठक बुलाना जरूरी होता है। बैठक में
  •  मौखिक स्पष्टीकरण लिया जाए
  • नाम के दुरुपयोग पर चर्चा हो
  • बहुमत से प्रस्ताव पास किया जाए
  • इस प्रस्ताव में चेतावनी, नाम उपयोग पर रोक या आवश्यकता पड़ने पर पद से हटाने तक का निर्णय लिया जा सकता है।

सार्वजनिक स्पष्टीकरण

यदि मीडिया, सोशल मीडिया या किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में संस्था का नाम गलत तरीके से इस्तेमाल किया है, तो संस्था सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट कर सकती है कि यह कार्य संस्था की अनुमति से नहीं किया गया।

कानूनी और प्रशासनिक रास्ता

यदि नाम का दुरुपयोग लगातार जारी रहे और संस्था की छवि को नुकसान हो, तो वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा जा सकता है। साथ ही, अगर संस्था ट्रस्ट एक्ट, सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट या कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है, तो संबंधित रजिस्ट्रार में शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है।

निष्कर्ष

संस्था का नाम बिना अनुमति इस्तेमाल करना गलत है और इसके खिलाफ शांत, कानूनी और संगठित तरीके से कार्रवाई की जा सकती है। अध्यक्ष पद जिम्मेदारी का प्रतीक है, न कि मालिकाना हक का।