निरीक्षण के नाम पर दबाव से परेशान ई-मित्र संचालक ने आईडी बंद कराने का आवेदन दिया, पारदर्शी व्यवस्था की मांग तेज
निरीक्षण के नाम पर दबाव से परेशान ई-मित्र संचालक ने आईडी बंद कराने का आवेदन दिया
बीकानेर में डिजिटल सेवाओं से जुड़े ई-मित्र संचालक आईडी बंद आवेदन का मामला इन दिनों चर्चा में है। आमजन को सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने वाले ई-मित्र केंद्रों से जुड़ा यह मुद्दा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
मामले के अनुसार, एक ई-मित्र संचालक ने अपनी आईडी स्थायी रूप से बंद करने के लिए आवेदन दिया है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पिछले कुछ समय से अलग-अलग लोग “निरीक्षण” के नाम पर केंद्र पर पहुंच रहे हैं। संचालक का कहना है कि ये लोग न तो अधिकृत पहचान पत्र दिखाते हैं और न ही किसी विभागीय आदेश की प्रति प्रस्तुत करते हैं। इसके बावजूद वे सीधे केंद्र पर पहुंचकर रेट लिस्ट, दस्तावेज़ और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश देने लगते हैं।
संचालक के अनुसार, ऐसी अस्पष्ट और अनियमित निरीक्षण प्रक्रिया से न केवल कामकाज प्रभावित होता है, बल्कि मानसिक तनाव और असुरक्षा की भावना भी बढ़ती है। इन्हीं परिस्थितियों से परेशान होकर उसने अपनी ई-मित्र संचालक आईडी बंद आवेदन के माध्यम से केंद्र संचालन से अलग होने का निर्णय लिया है।
ई-मित्र केंद्र राजस्थान सरकार की डिजिटल सेवा प्रणाली की अहम कड़ी माने जाते हैं। यहां से नागरिकों को प्रमाणपत्र, बिल भुगतान, आवेदन सेवाएं और कई अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि संचालक स्वयं असुरक्षित महसूस करें, तो इसका सीधा असर सेवा की गुणवत्ता और आम नागरिकों की सुविधा पर पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, यह समस्या केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं हो सकती। कई संचालक अनौपचारिक बातचीत में बताते हैं कि निरीक्षण प्रक्रिया में स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी है। उनका सुझाव है कि अधिकृत अधिकारियों की पहचान सुनिश्चित करने, विजिट की पूर्व सूचना देने और निरीक्षण के लिखित रिकॉर्ड जैसी प्रक्रियाएं अनिवार्य की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता केवल तकनीकी ढांचे से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यरत ऑपरेटरों के विश्वास, सुरक्षा और सम्मान से भी जुड़ी है। यदि निरीक्षण प्रणाली पारदर्शी, पहचान आधारित और नियमबद्ध हो, तो न केवल संचालकों का भरोसा बढ़ेगा बल्कि आम जनता को भी बेहतर और सुचारू सेवा मिल सकेगी।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस ई-मित्र संचालक आईडी बंद आवेदन को एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मानकर निपटाता है या इसे एक संकेत के रूप में लेकर निरीक्षण व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाता है। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशीलता की एक अहम कसौटी बनता जा रहा है।


