लोकसभा चुनाव 2024: राजस्थान में बीजेपी की रणनीति,भजनलाल शर्मा ने शुरू की सेटिंग! रविंद्र सिंह भाटी से की मुलाकात
राजस्थान में बीजेपी के लिए बाड़मेर-जैसलमेर सीट पर रविंद्र सिंह भाटी की चुनौती बड़ी महत्वपूर्ण है। इस चुनाव में उनका फैसला बीजेपी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है।
लोकसभा चुनाव 2024: राजस्थान में बीजेपी की रणनीति,भजनलाल शर्मा ने शुरू की सेटिंग! रविंद्र सिंह भाटी से की मुलाकात
लोकसभा चुनाव 2024 के नजदीकी राजस्थान में बीजेपी के लिए मिशन 25 को पूरा करने का मामूली वादा है। इस कठिन मिशन में, बीजेपी बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट पर विपक्षी मुकाबले को विराम देने की कोशिश कर रही है। इस कारण राजस्थान के मुख्यमंत्री, भजनलाल शर्मा ने खुद को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। यहाँ बाड़मेर-जैसलमेर सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार, रविंद्र सिंह भाटी, बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है। उनकी लोकप्रियता के कारण, बीजेपी के लिए यह सीट अब अधिक मुश्किल हो गई है।
मुलाकात में नहीं बनी बात:- मुलाकात में भजनलाल शर्मा और रविंद्र सिंह भाटी के बीच हुई, लेकिन बात अब तक पूरी नहीं बनी है। भजनलाल शर्मा ने रविंद्र सिंह भाटी को बीजेपी में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है, परंतु रविंद्र सिंह भाटी ने कुछ ऐसी शर्तें रखी हैं जो बीजेपी को सोचने पर मजबूर कर सकती हैं।
रविंद्र सिंह भाटी का निर्णय:- रविंद्र सिंह भाटी ने बताया है कि उन्होंने मुख्यमंत्री से बात की है, लेकिन आगे की सभी निर्णयों को अपने क्षेत्र के लोगों के साथ समझौता करेंगे। मुख्यमंत्री ने उन्हें सलाह दी है कि पार्टी को युवा कार्यकर्ता और ऊर्जावान लोगों की आवश्यकता है, और अगर रविंद्र सिंह भाटी जैसे लोग भाजपा के साथ जुड़ते हैं, तो इससे पार्टी को एक अलग संदेश मिलेगा।
रविंद्र सिंह भाटी की दृढ़ता:- रविंद्र सिंह भाटी ने हमेशा अपने निर्णयों को जनता और कार्यकर्ताओं के हाथों में छोड़ा है। उन्होंने पहले भी लोकसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था, और उससे पहले उन्हें अपार जनसमर्थन मिला था। इसी कारण बीजेपी में हलचल हो रही है, और अब बीजेपी ने उन्हें पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा है।
बाड़मेर जैसलमेर सीट का उम्मीदवार:- बीजेपी ने बाड़मेर-जैसलमेर सीट के लिए कैलाश चौधरी को उम्मीदवार घोषित किया है। हालांकि, रविंद्र सिंह भाटी की चुनौती के कारण, कैलाश चौधरी के लिए यहाँ जीत प्राप्त करना कठिन हो सकता है। रविंद्र सिंह भाटी का समर्थन न मिलने की स्थिति में, कैलाश चौधरी को सीट जीतना और भी मुश्किल हो सकता है।