श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज़ कुरियन की स्मृति में डेयरी विज्ञान महाविद्यालय बीकानेर में कार्यक्रम

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर RAJUVAS के डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, बीकानेर में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज़ कुरियन को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में डेयरी क्षेत्र के बढ़ते रोजगार अवसरों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।

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श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज़ कुरियन की स्मृति में डेयरी विज्ञान महाविद्यालय बीकानेर में कार्यक्रम
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राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर RAJUVAS बीकानेर में आयोजित कार्यक्रम में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज़ कुरियन को याद किया गया

बीकानेर। पशु एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (RAJUVAS) के संघटक डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, बीकानेर में सोमवार को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह दिवस भारत के महान दुग्ध पुरुष और श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज़ कुरियन की जयंती (26 नवम्बर 1921) के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राहुल सिंह पाल ने उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि डॉ. कुरियन ने अपने जीवनकाल में दुग्ध उत्पादन और डेयरी उद्योग को नई दिशा दी। उनके अथक प्रयासों के कारण ही आज भारत विश्व में दूध उत्पादन के क्षेत्र में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में देश में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 471 ग्राम प्रति दिवस तक पहुँच गई है, जो कि स्वास्थ्य मानकों से भी अधिक है।

हालांकि, प्रति पशु प्रति दिन दूध उत्पादन अभी भी अपेक्षित स्तर से कम है। इस दिशा में सरकार, वैज्ञानिकों और डेयरी समितियों द्वारा निरंतर अनुसंधान और योजनाएँ चलाई जा रही हैं ताकि दुग्ध उत्पादन को और बढ़ाया जा सके। डॉ. पाल ने कहा कि दूध एक संपूर्ण आहार है, जिसमें मानव शरीर की वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक लगभग सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ऊरमूल डेयरी, बीकानेर के इंजीनियर श्री ओम प्रकाश भाभू ने विद्यार्थियों से डेयरी क्षेत्र को रोजगार की दृष्टि से एक उज्ज्वल विकल्प मानने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि डेयरी उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है, और इस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। भाभू ने विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ समर्पण, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पाद विकास की कला सीखने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मुकुल सैन द्वारा की गई और अंत में आभार ज्ञापन भी उन्हीं ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षकगण, शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस का यह आयोजन न केवल डॉ. कुरियन के योगदान को स्मरण करने का अवसर बना, बल्कि विद्यार्थियों को डेयरी क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं, चुनौतियों और आधुनिक तकनीकों के बारे में अवगत कराने में भी अत्यंत उपयोगी साबित हुआ।

बीकानेर सहित पूरे देश में इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और डेयरी किसानों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना रहा।