एसएमएस दिव्यांग सेवा संस्था के पैरा स्पोर्ट खिलाड़ियों ने जीते स्वर्ण-सिल्वर-ब्रॉन्ज, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में चमका बीकानेर

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एसएमएस दिव्यांग सेवा संस्था के पैरा स्पोर्ट खिलाड़ियों ने जीते स्वर्ण-सिल्वर-ब्रॉन्ज, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में चमका बीकानेर
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एसएमएस दिव्यांग सेवा संस्था के पैरा स्पोर्ट खिलाड़ियों ने जीते स्वर्ण-सिल्वर-ब्रॉन्ज, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में चमका बीकानेर

बीकानेर।
एसएमएस दिव्यांग सेवा संस्था के पैरा स्पोर्ट खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय पैरा स्पोर्ट्स प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर बीकानेर का नाम रोशन किया। टीम ने विभिन्न खेल वर्गों में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल करते हुए प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों की मेहनत, कोच के मार्गदर्शन और संस्था के सहयोग ने इस उपलब्धि को खास बना दिया।

प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। दुर्गा गहलोत ने क्लब थ्रो में स्वर्ण तथा शॉट पुट में कांस्य पदक जीता। नीरज भाटी ने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण और शॉट पुट में रजत पदक प्राप्त किया। नवरत्न सुथार ने डिस्कस थ्रो व शॉट पुट दोनों में कांस्य पदक हासिल किया।
गौरव सोनी ने स्पीड और स्किल का शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 मीटर दौड़ और लॉन्ग जंप दोनों में स्वर्ण पदक जीते।
शोभा पंचारिया ने 100 मीटर में रजत तथा 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक लेकर अपना दम दिखाया।
सुरेश मेघवाल ने जैवलिन थ्रो में कांस्य पदक प्राप्त किया।
गुड्डी कुमारी ने 100 मीटर एवं 400 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर प्रभावी प्रदर्शन किया।
गजेंद्र मेघवाल ने लॉन्ग जंप में रजत पदक जीता, जबकि सौभाग्य श्री ने भी 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया।

खिलाड़ियों की सफलताओं पर संस्था में हर्ष का माहौल है। संस्था की अध्यक्ष श्रीमती मंजू गुलगुलिया जैन ने सभी विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एसएमएस दिव्यांग सेवा संस्था दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य भविष्य में भी निरंतर जारी रखेगी।

खिलाड़ियों की सफलता के पीछे कोच नरेंद्र शर्मा की भूमिका महत्वपूर्ण रही। नियमित अभ्यास, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर विशेष फोकस के कारण खिलाड़ियों ने राज्य स्तर पर प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाई। संस्था ने बताया कि आगे राष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी की तैयारियां भी शुरू की जा रही हैं ताकि बीकानेर के खिलाड़ी देशभर में अपनी पहचान दर्ज करा सकें।

इस उपलब्धि ने यह साबित किया है कि यदि प्रतिभा को सही दिशा, संसाधन और प्रेरणा मिले तो दिव्यांग खिलाड़ी भी हर स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। बीकानेर के इन विजेताओं ने समाज के लिए नया उदाहरण प्रस्तुत किया है और कई युवाओं को प्रेरणा दी है।