महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में परीक्षा भवन का नाम ‘गुरु जम्भेश्वर भवन’, कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित बोले, विश्व को जीने की राह दिखाई
महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के परीक्षा भवन का नाम ‘गुरु जम्भेश्वर भवन’ रखा गया। कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित ने गुरु जम्भेश्वरजी की पर्यावरण संरक्षण संबंधी शिक्षाओं को आज भी विश्व के लिए प्रासंगिक बताया
महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में परीक्षा भवन का नाम ‘गुरु जम्भेश्वर भवन’, प्रो. मनोज दीक्षित बोले, विश्व को जीने की राह दिखाई
बीकानेर। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में महापुरुषों के सम्मान और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए परीक्षा भवन का नाम ‘गुरु जम्भेश्वर भवन’ रखा गया। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित ने भवन में गुरु जम्भेश्वरजी के चित्र, संक्षिप्त जीवन परिचय और उनके 29 नियमों की पट्टिका का अनावरण किया।
कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि गुरु जम्भेश्वरजी ने विश्व को पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की अनूठी राह दिखाई। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रकृति और जैव विविधता को बचाने के लिए गुरु जम्भेश्वरजी के सिद्धांत पहले से अधिक प्रासंगिक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि गुरु जम्भेश्वरजी का उपदेश स्थल, निर्वाण स्थल और समाधि स्थल तीनों ही बीकानेर जिले में स्थित हैं, जो इस क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने माता अमृतादेवी बिश्नोई और 363 बिश्नोई बलिदानियों के त्याग को याद करते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में अमृतादेवी बिश्नोई उद्यान की स्थापना भी की गई है तथा भविष्य में गुरु जम्भेश्वरजी की शिक्षाओं पर शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।
जाम्भाणी साहित्य अकादमी के महासचिव विनोद जम्भदास ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में ऐसे नवाचार विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा और महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि गुरु जम्भेश्वरजी के सिद्धांतों पर होने वाले शोध में अब महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय भी अग्रणी संस्थानों में शामिल होगा।
अकादमी के कोषाध्यक्ष भंवरलाल कड़वासरा ने कहा कि वर्तमान भौतिकवादी दौर और प्रतिस्पर्धा के वातावरण में गुरु जम्भेश्वरजी के सिद्धांत समाज को संतुलित और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
राजस्थानी मोट्यार परिषद के रामावतार शर्मा ने कहा कि गुरु जम्भेश्वरजी किसी एक समाज या पंथ तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनकी शिक्षाएं संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती हैं और आज भी उनके बनाए नियम हर व्यक्ति के जीवन को सरल एवं अनुशासित बनाने में मार्गदर्शक हैं।
कार्यक्रम के दौरान जाम्भाणी साहित्य अकादमी की ओर से कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित का साफा पहनाकर एवं लोई ओढ़ाकर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर राजकीय विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भगवानाराम बिश्नोई, डॉ. बी.एल. बिश्नोई, डॉ. एल.सी. बिश्नोई, डॉ. रामेश्वरलाल बिश्नोई, जीवरक्षा अध्यक्ष मोखराम धारणियां, शिवराज खीचड़, हरिश्चंद्र लेघा, हरिराम खीचड़, दूलीचंद गोदारा, देव दत्त, सुभाष खीचड़, सुखराम भाम्भू, मोट्यार परिषद के राजेश चौधरी, प्रशांत जैन, सुनील बिश्नोई, हरिराम गोदारा, मोहित बिश्नोई, योगेंद्र सिंह, नखतूचंद सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, समाजसेवी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।


