बीकानेर में ‘सांस्कृतिक यात्रा 2026’ का समापन, प्रयत्न संस्था के ऐतिहासिक नाटकों ने बच्चों में जगाई राष्ट्रभक्ति और संस्कारों की भावना
बीकानेर में प्रयत्न स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की ‘सांस्कृतिक यात्रा 2026’ का समापन हुआ। महाराणा प्रताप और स्वराज जैसे ऐतिहासिक नाटकों के जरिए बच्चों में संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया।
बीकानेर में ‘सांस्कृतिक यात्रा 2026’ का समापन, ऐतिहासिक नाटकों ने बच्चों में जगाई राष्ट्रभक्ति और संस्कारों की भावना
बीकानेर। बच्चों, विद्यार्थियों और युवाओं में शिक्षा, संस्कार, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने के उद्देश्य से वर्ष 2025 में बीकानेर से शुरू हुई प्रयत्न स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की ‘सांस्कृतिक यात्रा 2026’ का रविवार को समापन हुआ।
गुरुग्राम से बीकानेर तक आयोजित इस सांस्कृतिक यात्रा के दौरान प्रयत्न संस्था की नाट्यशाला ग्रुप ने ‘महाराणा प्रताप भारत का गौरव’ और ‘स्वराज’ जैसे ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी नाटकों का विभिन्न विद्यालयों और संस्थाओं में मंचन किया।
सात दिनों में 15 नाटकों का मंचन
सांस्कृतिक यात्रा 2026 बीकानेर के तहत 11 अगस्त से 17 अगस्त तक सात दिनों में कुल 15 नाटकों का मंचन किया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों और दर्शकों को भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्यायों, वीरता, त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम से परिचित कराया गया।
इस दौरान माहेश्वरी पब्लिक स्कूल, महिला मंडल, ग्रीनफील्ड हाई स्कूल, हल्दीराम राजकीय विद्यालय सूरसागर सहित अंबासर और नौरंगदेसर के ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में भी नाटकों का मंचन किया गया। हजारों विद्यार्थियों ने इन प्रस्तुतियों को उत्साह और उमंग के साथ देखा।
शिक्षा के साथ संस्कार और भारतीय संस्कृति पर जोर
प्रयत्न स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी शिक्षा तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, संस्कार, देशभक्ति और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करना है।
संस्था की ओर से बच्चों को योग एवं प्राणायाम, मंत्रोच्चारण, कंप्यूटर प्रशिक्षण तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स के माध्यम से व्यावहारिक एवं आधुनिक शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रणीत सुशील के निर्देशन में सांस्कृतिक यात्रा
संस्था के संस्थापक प्रणीत सुशील की देखरेख एवं मार्गदर्शन में इस सांस्कृतिक यात्रा का संचालन किया जा रहा है। उनके निर्देशन में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रणीत सुशील द्वारा लिखित एवं निर्देशित ऐतिहासिक नाटकों के माध्यम से जनजागरण और देशभक्ति की भावना का संदेश दर्शकों तक पहुंचाया जा रहा है।
वीर योद्धाओं की गाथाओं को मंच पर किया जीवंत
‘स्वराज’, महाराणा प्रताप और सम्राट अशोक महान जैसे ऐतिहासिक विषयों पर आधारित नाटकों के जरिए बच्चों को देश के गौरवशाली इतिहास, वीरता, त्याग और राष्ट्रप्रेम से परिचित कराया जा रहा है।
संस्था से जुड़े एक बच्चे को प्रशिक्षण देकर सिविल इंजीनियर के रूप में आत्मनिर्भर बनाने में भी सहयोग किया गया। संस्था के अनुसार, उसके विवाह में भी सहयोग किया गया। आज वही युवा देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर वीर योद्धाओं की गौरवगाथाओं को नाटक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
लालेश्वर महादेव मंदिर में हुआ ऐतिहासिक नाटक का मंचन
सांस्कृतिक यात्रा के अंतिम चरण में रविवार को लालेश्वर महादेव मंदिर, शिवबाड़ी, बीकानेर में ऐतिहासिक नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से बच्चों ने वीरता, त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर लालेश्वर महादेव मंदिर के पीठाधीश श्री विमर्शानंद जी ने बच्चों को आशीर्वाद प्रदान किया।
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के बच्चों को महाराणा प्रताप और सम्राट अशोक जैसे महान योद्धाओं के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। ऐसे ऐतिहासिक प्रसंग और वीर गाथाएं बच्चों में जोश, आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम और संस्कारों का संचार करती हैं।
डॉ. सोनाली सक्सेना की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम में बच्चों को नाटक एवं विभिन्न गतिविधियों के लिए मार्गदर्शन देने वाली डॉ. सोनाली सक्सेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन में बच्चों ने ऐतिहासिक पात्रों और घटनाओं को मंच पर जीवंत किया और दर्शकों को भारत के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराया।
शिक्षा और संस्कृति को जोड़ने की पहल
प्रयत्न स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की यह पहल शिक्षा के साथ संस्कार, भारतीय संस्कृति, तकनीकी ज्ञान और राष्ट्रभक्ति को जोड़ने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में सामने आई है।
संस्था का उद्देश्य बच्चों को केवल शिक्षित करना ही नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारित, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना है। सांस्कृतिक यात्रा 2026 के दौरान हुए ऐतिहासिक नाटकों ने इसी उद्देश्य को प्रभावी तरीके से दर्शकों और विद्यार्थियों तक पहुंचाया।
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