राजस्थान में मूल निवास प्रमाण पत्र के नए नियम जारी, अब ये दस्तावेज होंगे जरूरी
राजस्थान में मूल निवास प्रमाण पत्र के नए नियम जारी, अब ये दस्तावेज होंगे जरूरी
जयपुर। राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किन परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को राजस्थान का मूल निवासी माना जाएगा और इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक होंगे।
नई व्यवस्था के तहत प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने का प्रयास किया गया है।
नई गाइडलाइन के अनुसार जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी, सहायक कलेक्टर और तहसीलदार को मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
10 साल का निवास होगा मुख्य आधार
नई गाइडलाइन के अनुसार वही व्यक्ति राजस्थान का मूल निवासी माना जाएगा:
- जिसके माता-पिता राजस्थान के मूल निवासी हों
- या आवेदक स्वयं अथवा उसके माता-पिता पिछले कम से कम 10 वर्षों से राजस्थान में निवास कर रहे हों
इसके लिए निम्न दस्तावेज मान्य होंगे:
- जन्म प्रमाण पत्र
- माता-पिता का मूल निवास प्रमाण पत्र
- वोटर आईडी
- आधार कार्ड
- पासपोर्ट
- ड्राइविंग लाइसेंस
यदि कोई व्यक्ति 10 वर्षों से राजस्थान में रह रहा है, तो उसे लगातार 10 साल के बिजली, पानी या टेलीफोन बिल भी प्रस्तुत करने होंगे, ताकि निवास की निरंतरता साबित हो सके।
महिलाओं को विशेष राहत
नई गाइडलाइन में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान भी किए गए हैं। यदि किसी महिला का विवाह राजस्थान के मूल निवासी पुरुष से हुआ है और वह पति के साथ राज्य में निवास कर रही है, तो उसे भी राजस्थान का मूल निवासी माना जाएगा।
इसके लिए आवश्यक दस्तावेज:
- विवाह प्रमाण पत्र
- पति के मूल निवास से जुड़े दस्तावेज
सरकारी कर्मचारियों को भी लाभ
राज्य या केंद्र सरकार के अधीन राजस्थान में तीन वर्षों से पदस्थापित कर्मचारियों और उनके परिवारों को भी मूल निवासी का दर्जा दिया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि नई गाइडलाइन लागू होने से मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी।


