श्रीडूंगरगढ़ में नेत्रदान जागरूकता अभियान, तुलसी सेवा संस्थान में लिया मानवता की सेवा का संकल्प

श्रीडूंगरगढ़ के तुलसी सेवा संस्थान में नेत्रदान पखवाड़े के तहत जागरूकता अभियान आयोजित हुआ। तेरापंथ युवक परिषद के कार्यकर्ताओं सहित स्टाफ ने नेत्रदान का संकल्प लेकर लोगों को प्रेरित करने का संदेश दिया।

श्रीडूंगरगढ़ में नेत्रदान जागरूकता अभियान, तुलसी सेवा संस्थान में लिया मानवता की सेवा का संकल्प
श्रीडूंगरगढ़ में नेत्रदान जागरूकता अभियान, तुलसी सेवा संस्थान में लिया संकल्प
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श्रीडूंगरगढ़ में नेत्रदान जागरूकता अभियान, तुलसी सेवा संस्थान में लिया मानवता की सेवा का संकल्प

श्रीडूंगरगढ़, 7 सितंबर। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के “Vision for Visionless 2.0” अभियान के अंतर्गत चल रहे राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत तेरापंथ युवक परिषद श्रीडूंगरगढ़ की ओर से तुलसी सेवा संस्थान में नेत्रदान जागरूकता अभियान आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूक करना और मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में दृष्टि का उजाला पहुंचाने के लिए प्रेरित करना रहा।

स्टाफ ने लिया नेत्रदान का संकल्प

कार्यक्रम में तुलसी सेवा संस्थान के नर्सिंग एवं तकनीकी स्टाफ, प्रशासक सूर्य प्रकाश गांधी सहित डॉ. एन.पी. मारू, प्रवीण कुमार गुप्ता, अरिहंत बैद, राजकुमार सुथार और रामानंद सिद्ध मौजूद रहे।

सभी ने नेत्रदान के महत्व को समझते हुए समाज में अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

नेत्रदान के महत्व की दी जानकारी

तेरापंथ युवक परिषद श्रीडूंगरगढ़ के अध्यक्ष विक्रम मालू एवं सलाहकार अशोक झाबक ने उपस्थितजनों को नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने नेत्रदान को मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए लोगों से इस दिशा में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन एवं आभार ज्ञापन परिषद के कोषाध्यक्ष चमन श्रीमाल ने किया।

कार्यकर्ताओं और गणमान्यजनों की रही सहभागिता

इस अवसर पर प्रवीण बोथरा, शुभम बोथरा, दीपक छाजेड़, रोशन सिंघी, रौनक पारख और नारायण माली सहित अनेक कार्यकर्ता एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान तुलसी सेवा संस्थान का सम्मान भी किया गया और संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

“मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया रोशन करें”

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि नेत्रदान केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि किसी की अंधेरी दुनिया में रोशनी देने का माध्यम है। मृत्यु के बाद किए गए नेत्रदान से जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में दृष्टि का उजाला लौटाने में मदद मिल सकती है।

उपस्थितजनों ने स्वयं नेत्रदान का संकल्प लेने के साथ अपने परिवार, मित्रों और समाज के अधिक से अधिक लोगों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

“नेत्रदान करें, मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया रोशन करें।”