बीकानेर में डिजिटल अरेस्ट ठगी का खौफनाक मामला: फर्जी NIA अफसर बनकर सास-बहू से 3 दिन में ठगे 48 लाख रुपये
बीकानेर में डिजिटल अरेस्ट ठगी का सनसनीखेज मामला, फर्जी NIA अफसर बनकर 48 लाख की ठगी
Bikaner के करणी नगर इलाके से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर एक बुजुर्ग महिला और उनकी पुत्रवधू से 48 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को National Investigation Agency (NIA) का अधिकारी बताया और तीन दिन तक दोनों महिलाओं को मानसिक रूप से घर में कैद रखा।
क्या है डिजिटल अरेस्ट ठगी
डिजिटल अरेस्ट ठगी में अपराधी फोन और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को यह यकीन दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में फंस चुका है। गिरफ्तारी, जेल और बदनामी का डर दिखाकर पीड़ित को किसी से बात न करने और उनके निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाता है।
कैसे दिया गया वारदात को अंजाम
पुलिस के अनुसार, करणी नगर, लालगढ़ निवासी कांता शर्मा और उनकी पुत्रवधू शिखा पांडे को 21, 22 और 23 तारीख को अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आए। ठगों ने व्हाट्सएप पर सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश और अरेस्ट वारंट भेजे। इतना ही नहीं, वीडियो कॉल पर एक ऐसा ऑफिस दिखाया गया, जिसकी दीवार पर NIA का लोगो लगा था और 3-4 लोग खड़े नजर आ रहे थे, ताकि मामला पूरी तरह असली लगे।
डर का ऐसा माहौल कि बच्चे भी दूर
ठगों के डराने का असर इतना गहरा था कि दोनों महिलाएं घबराकर घर में मौजूद बच्चों को भी कमरे में आने नहीं दे रही थीं। जब उन्होंने रो-रोकर खुद को बेगुनाह बताया, तो ठगों ने “मामला सुलझाने” के नाम पर पैसों की मांग कर दी।
बैंक तक जाने की शर्तों के साथ इजाजत
महिलाओं ने जब कहा कि वे इतनी बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर नहीं कर सकतीं, तो ठगों ने बैंक जाने की अनुमति दी, लेकिन सख्त शर्त रखी कि किसी से बात नहीं करनी है। इसके बाद दोनों महिलाएं केईएम रोड स्थित State Bank of India (SBI) पहुंचीं, जहां कांता शर्मा ने अपनी एफडी तुड़वाकर रकम सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर करवाई। बाद में RTGS के जरिए दो अलग-अलग खातों में कुल 48 लाख रुपये भेज दिए गए।
पुलिस जांच और अपील
घटना की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई गई है। साइबर थाना प्रभारी रमेश सर्वटा के अनुसार, कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच जारी है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
पुलिस ने साफ कहा है कि कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे मांगती है। अगर कोई खुद को पुलिस, NIA या किसी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए, तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत करें।
यह मामला साफ करता है कि डिजिटल अरेस्ट ठगी अब आम लोगों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है और सतर्कता ही इसका सबसे मजबूत बचाव है।


