बीकानेर में होलाष्टक पर उस्ताद जमना दास कल्ला की रम्मत: कीकाणी व्यास चौक में सजेगा स्वांग का रंगमंच
बीकानेर में होलाष्टक पर उस्ताद जमना दास कल्ला की रम्मत: कीकाणी व्यास चौक में सजेगा स्वांग का रंगमंच
राजस्थान के बीकानेर शहर में होलाष्टक के अवसर पर स्वांग मेहरी रम्मतों की परंपरा एक बार फिर जीवंत होने जा रही है। कीकाणी व्यास चौक में आयोजित होने वाली उस्ताद जमना दास कल्ला की रम्मत इस श्रृंखला का प्रमुख आकर्षण मानी जाती है। यह रम्मत शनिवार रात से शुरू होकर रविवार सुबह तक चलेगी, जिसमें बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल होने की संभावना है।
रम्मत से जुड़े कलाकार एड मदनगोपाल व्यास के अनुसार, इस रम्मत का मंचन रियासतकाल से निरंतर होता आ रहा है। वर्षों से उस्तादों और कवियों ने अपने व्यंग्यपूर्ण ख्याल गीतों और प्रभावशाली प्रस्तुतियों से इसे विशेष पहचान दिलाई है। कई पारंपरिक ख्याल गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं और होली के माहौल को रंगीन बना देते हैं।
कार्यक्रम का आगाज रात 12 बजे मां लटियाल स्वरूप के अखाड़े में स्तुति वंदना के साथ होगा। इस दौरान बाल स्वरूप गोपाल ओझा मां लटियाल का रूप धारण करेंगे। मां लटियाल के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक रम्मत स्थल पर पहुंचेंगे। यह दृश्य श्रद्धा और लोकनाट्य परंपरा का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।
रम्मत के दौरान कलाकार चौमासा और ख्याल गीतों का गायन करेंगे। विशेष रूप से झम्मू मस्तान द्वारा रचित ख्याल, लावणी और चौमासे के माध्यम से सत्ता और शासन पर तीखे व्यंग्य के साथ प्रेम और विरह के भाव भी प्रस्तुत किए जाएंगे। यही मिश्रण रम्मत को मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देने का माध्यम बनाता है।
रविवार सुबह आशीष एंड पार्टी द्वारा राधा-कृष्ण की पुष्प होली खेली जाएगी, जो कार्यक्रम का आकर्षक हिस्सा रहेगा। यह प्रस्तुति रंगों, फूलों और भक्ति भाव से सराबोर वातावरण तैयार करेगी।
रम्मत की विशेषता यह भी है कि इसमें टेरिये और वादक अखाड़े में एक ओर बैठकर पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुति को जीवंत बनाते हैं। यह सामूहिक प्रस्तुति लोकनाट्य की उस शैली को दर्शाती है, जो पीढ़ियों से बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान रही है।
उस्ताद जमना दास कल्ला की रम्मत केवल एक मंचन नहीं, बल्कि बीकानेर की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उत्सव है। होलाष्टक के इस अवसर पर शहर की गलियों में लोकसंगीत, व्यंग्य और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का कार्य करता है।


