Ganesh Utsav 2021: दंतेवाड़ा की पहाड़ी पर स्थित है श्रीगणेश की ये 1 हजार साल पुरानी दुर्लभ प्रतिमा

Ganesh Utsav 2021: दंतेवाड़ा की पहाड़ी पर स्थित है श्रीगणेश की ये 1 हजार साल पुरानी दुर्लभ प्रतिमा
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दंतेवाड़ा के ढोलकल पहाड़ पर स्थित सैकड़ों साल पुरानी यह भव्य गणेश प्रतिमा आज भी लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बनी हुई है। ये दुनिया में भगवान गणपति की सबसे दुर्लभ प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है।

इन्हें दंतेवाड़ा का रक्षक भी कहा जाता है। गणेश उत्सव (Ganesh Utsav 2021) के अवसर पर जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें.

1 हजार साल पुरानी है ये प्रतिमा
भगवान श्रीगणेश की ये प्रतिमा लगभग एक हजार साल पुरानी है, जो नागवंशी राजाओं के काल में बनाई गई थी। सदियों पहले इतने दुर्गम इलाके में इतनी ऊंचाई पर स्थापित की गई यह गणेश प्रतिमा आश्चर्य के कम नहीं है। यहां पर पहुंचना आज भी बहुत जोखिम भरा काम है। पुरातत्वविदों का अनुमान यह है 10वीं-11वीं शताब्दी में दंतेवाड़ा क्षेत्र के रक्षक के रूप नागवंशियों ने गणेश जी की यह मूर्ति यहां पर स्थापना की थी।

भव्य है गणेश प्रतिमा
पहाड़ी पर स्थापित गणेश प्रतिमा लगभग 3-4 फीट ऊंची ग्रेनाइट पत्थर से बनी हुई है। यह प्रतिमा वास्तुकला की दृष्टि से बहुत ही कलात्मक है। गणपति की इस प्रतिमा में ऊपरी दाएं हाथ में फरसा, ऊपरी बाएं हाथ में टूटा हुआ एक दंत, नीचे दाएं हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला धारण किए हुए तथा नीचे बाएं हाथ में मोदक धारण किए हुए हैं। पुरातत्वविदों के मुताबिक इस प्रकार की प्रतिमा बस्तर क्षेत्र में कहीं नहीं मिलती है।

यहां गिरा था गणपति का दांत
दंतेश का क्षेत्र (वाड़ा) को दंतेवाड़ा कहा जाता है। इस क्षेत्र में एक कैलाश गुफा भी है। इस क्षेत्र से जुड़ी एक मान्यता है कि यह वही कैलाश क्षेत्र है, जहां पर श्रीगणेश एवं परशुराम के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में गणपति का एक दांत टूटकर यहां गिरा था। तभी गणपति का एकदंत नाम भी पड़ा। यहां पर दंतेवाड़ा से ढोलकल पहुंचने के मार्ग में एक ग्राम परसपाल मिलता है, जो परशुराम के नाम से जाना जाता है। इसके आगे ग्राम कोतवाल पारा आता है। कोतवाल का अर्थ होता है रक्षक।

दंतेवाड़ा के रक्षक हैं श्रीगणेश
मान्यताओं के अनुसार, इतनी ऊंची पहाड़ी पर भगवान गणेश की स्थापित नागवंशी शासकों ने की थी। गणेश प्रतिमा के पेट पर एक नाग का चिह्न मिलता है। कहा जाता है कि मूर्ति का निर्माण करवाते समय नागवंशियों ने यह चिह्न भगवान गणेश पर अंकित किया होगा। कला की दृष्टि से यह मूर्ति 10-11 शताब्दी की (नागवंशी) प्रतिमा कही जा सकती है।

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Hundreds of years old Ganesh idol situated on the Dholkal mountain of Dantewada remains a matter of surprise for the people even today.  It is considered to be one of the rarest idols of Lord Ganapati in the world.

 He is also called the protector of Dantewada.  Know the special things related to this temple on the occasion of Ganesh Utsav 2021.

 This statue is 1 thousand years old
 This idol of Lord Shri Ganesh is about a thousand years old, which was made during the period of Nagvanshi kings.  This Ganesh idol, established centuries ago at such a height in such an inaccessible area, is not less than a surprise.  Reaching here is still a very risky job.  It is estimated by archaeologists that in the 10th-11th century, this idol of Ganesh ji was established here by the Nagavanshis as the protector of the Dantewada region.

 Gorgeous Ganesh Idol
 The Ganesh idol installed on the hill is made of granite stone about 3-4 feet high.  This statue is very artistic from the point of view of architecture.  In this idol of Ganapati, he holds an ax in the upper right hand, a broken tooth in the upper left hand, Akshamala in Abhaya Mudra in the lower right hand and Modak in the lower left hand.  According to archaeologists, this type of statue is not found anywhere in Bastar region.

 Ganpati's tooth had fallen here
 The area (Wada) of Dantesh is called Dantewada.  There is also a Kailash cave in this area.  There is a belief related to this region that this is the same Kailash region, where the war between Shri Ganesh and Parashurama took place.  In this war, one of Ganapati's teeth was broken and fell here.  That's when Ganapati got the name Ekadanta.  Here on the way from Dantewada to Dholkal, a village Paraspal is found, which is known as Parashuram.  Next to it comes village Kotwal Para.  Kotwal means protector.

 Shri Ganesh is the protector of Dantewada
 According to the beliefs, Lord Ganesha was established on such a high hill by the Nagavanshi rulers.  The symbol of a snake is found on the belly of the Ganesha idol.  It is said that while getting the idol built, the Nagavanshis must have inscribed this symbol on Lord Ganesha.  From the point of view of art, this idol can be called a 10-11 century (Nagvanshi) statue.