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मयखानों की बोली रोकी: आवेदकों की संख्या कम देख विभाग ने नीलामी की स्थगित, अब 3 मार्च से लगेगी बोली

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मयखानों की बोली रोकी: आवेदकों की संख्या कम देख विभाग ने नीलामी की स्थगित, अब 3 मार्च से लगेगी बोली

 

  • 7665 दुकानों के लिए अब तक 23 हजार ने रजिस्ट्रेशन करवाया है
  • 16% ने ही अब तक बोली लगाने के लिए शुल्क जमा करवाया है।

राज्य सरकार की बनाई नई आबकारी नीति अब सरकार के लिए ही परेशानी खड़ी कर रही है। शराब की दुकान लेने के लिए पिछले साल जहां एक-एक दुकान के लिए 30 से 40 आवेदन आते थे, आज स्थिति ये है कि कई ऐसी दुकानें हैं जिनके लिए एक भी आवेदन नहीं आए है। राजस्व नुकसान होने की आशंका को देखते हुए आबकारी विभाग ने नीलामी की प्रक्रिया को 3 मार्च से शुरू करने का निर्णय किया है। जबकि तय शेड्यूल के मुताबिक आज से बोली लगनी थी।

राजधानी जयपुर की बात करें तो इस बार 404 दुकानें आवंटित की जाएगी। इन दुकानों के लिए अब तक करीब 1185 ने रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिसमें से 25% ने भी बिडिंग के लिए लाइसेंस फीस और अमानत राशि जमा नहीं करवाई है। आबकारी सूत्रों की माने तो पूरे राज्य की बात करें तो 7665 दुकानों के लिए अब तक 23 हजार ने रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिसमें से 16% ने ही अब तक बोली लगाने के लिए शुल्क जमा करवाया है। इसे देखते हुए आबाकारी विभाग ने अब 3, 4, 5, 9 और 10 मार्च को नीलामी करने की नई तारीख जारी की है।

इन करणों से शराब कारोबारियों का रुझान हुआ कम

  • पॉलिसी में RML (राजस्थान निर्मित अंग्रेजी मदिरा) की बिक्री का अनुपात बढ़ाकर 50% करना। ठेकेदारों का कहना है कि RML की बिक्री मौजूदा वित्त वर्ष में 30% से भी कम है।
  • लाइसेंस फीस की जगह कम्पोजिट फीस लगाई। शराब से जुड़े कारोबािरयों के मुताबिक लाइसेंस फीस अलग-अलग दुकानों की 11.50 लाख से लेकर 22 लाख रुपए तक लगती थी। इस बार कम्पोजिट फीस 10 से लेकर 50 लाख या उससे ज्यादा बैठ रही है।
  • इसी तरह पहले दुकानों को लॉटरी के जरिए आवंटित किया जाता था, जिसमें आवेदन शुल्क के साथ 23 से 28 हजार के बीच लगता था। साथ ही लॉटरी में कई लोगों का भाग्य होता था तो दुकान खुल जाती थी लेकिन इस बार आवेदन शुल्क 40 से 60 हजार रुपए के बीच कर दिया। वहीं आवंटन लॉटरी के बजाय नीलामी से होगा, जो सबसे ज्यादा बोली लगाएगा उसे ही दुकान मिलेगी।

सबसे महंगी दुकान की 18.99 करोड़ से लगेगी बोली
इस बार नीलामी की जो प्रक्रिया तय की गई है, उसमें दुकानों की बोली के लिए न्यूनतम रिजर्व प्राइज तय की है। पूरे राज्य की बात करें तो सबसे ज्यादा रिजर्व प्राइज डूंगरपुर जिले के खजूरी क्षेत्र की दुकान के लिए निर्धारित 18 करोड़ 99 लाख 33 हजार रुपए है। इसके अलावा दूसरी सबसे महंगी दुकान भी इसी जिले बिच्छीवाड़ा क्षेत्र की है, जिसकी न्यूनतम रिजर्व प्राइज 10 करोड़ 15 लाख रुपए रखी है।

पिछली बार आवेदन फीस से ही कमाए थे 800 करोड़ रुपए
राज्य में पहली बार ऑनलाइन नीलामी से शराब दुकानों का आंवटन किया जा रहा है। जिसके चलते इस बार शराब की दुकान लेने के लिए बहुत कम आवेदन आए हैं। साल 2020-21 की बात करें तो पूरे प्रदेश से 3.50 लाख आवेदन आए थे, तब दुकानों का आवंटन लॉटरी के जरिए किया गया था। उस समय सरकार को लॉटरी के आवेदन शुल्क से ही लगभग 800 करोड़ रुपए की आय हो गई थी, लेकिन इस बार लॉटरी से इतनी आय होना मुश्किल लग रहा है।

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