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पति-पत्नी और दोनों बेटियों ने आत्महत्या की: न दादी के अंतिम संस्कार में गए न भांजियों की शादी में, हनुमान मौत का सामान जुटाता रहा, इरादे भांप नहीं पाया परिवार, आज किया जाएगा चारों शवों का पोस्टमार्टम

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पति-पत्नी और दोनों बेटियों ने आत्महत्या की: न दादी के अंतिम संस्कार में गए न भांजियों की शादी में, हनुमान मौत का सामान जुटाता रहा, इरादे भांप नहीं पाया परिवार, आज किया जाएगा चारों शवों का पोस्टमार्टम

 

डिस्क्लेमर : इस तस्वीर से परिवारों को विचलित होना चाहिए। इसे छापने का उद्‌देश्य भी यही है। हादसे किसी के साथ भी हो सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, मित्र व पड़ोसी मुश्किल हालात में अवसाद से बाहर निकाल सकते हैं। एक-दूसरे को समय देकर दर्द साझा कर सकें तो ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। - Dainik Bhaskar

डिस्क्लेमर : इस तस्वीर से परिवारों को विचलित होना चाहिए। इसे छापने का उद्‌देश्य भी यही है। हादसे किसी के साथ भी हो सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, मित्र व पड़ोसी मुश्किल हालात में अवसाद से बाहर निकाल सकते हैं। एक-दूसरे को समय देकर दर्द साझा कर सकें तो ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।

  • पूरा परिवार रविवार को खत्म : बेटे की मौत 27 सितंबर 20 को हुई थी, उस दिन भी रविवार था, क्या ये सिर्फ दुसंयोग था या जानबूझकर यही दिन चुना।
  • दो सुसाइड नोट : एक प्रशासन व एक भाई के नाम। लिखा- सब कुछ है, लेकिन बेटे के बिना सब बेकार, हमने अपनी इच्छा से लिया मौत का फैसला।
  • दुनिया से कट गया था परिवार : बेटे की मौत के बाद पांच महीने से परिवार घर से बाहर नहीं निकलता था, सिर्फ हनुमान ड्यूटी पर जाता था।

पुराेहितजी की ढाणी में रविवार को पति-पत्नी व दोनों बेटियों की आत्महत्या की घटना से पूरा इलाका सदमे हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष स्व. मदनलाल सैनी के भतीजे हनुमान प्रसाद सैनी ने पत्नी व दो बेटियाें के साथ लोहे के गाटर पर फंदे लगाकर आत्महत्या कर ली। बेटे की मौत के बाद से पूरा परिवार पांच महीने से अवसाद में था।

हनुमानप्रसाद के दो बेटियों के जन्म के बाद बेटे अमर का जन्म हुआ था। घर का नाम भी उसके नाम पर अमर कुंज रखा हुआ था। उसकी चोटी के बाल भी संभाल कर रखे हुए थे। दोनों बहनें पूजा व अन्नू भी भाई काे जान से भी अधिक चाहती थीं। हनुमान ने बेटे की मौत के बाद छोटे भाई घनश्याम के बेटे युवराज को अपने पास रख रखा था। युवराज 16 फरवरी को बुआ की दो बेटियों की शादी में चला गया था। पीछे से यह घटना हो गई।

हनुमान सुबह 11 बजे ही छोटे भाई घनश्याम से मिलकर आया था। छोटे भाई को भी उसके इरादों के बारे में पता नहीं चला। इसके बाद हनुमानप्रसाद घर लौटा और परिवार ने साथ खाना भी खाया। इसके बाद सुसाइड नोट लिखा और आत्महत्या कर ली। हनुमान का बेटा 18 वर्षीय अमर 27 सितंबर 2020 को सुबह खेलने जा रहा था।

इस दौरान उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। अमर की मृत्यु के बाद से पूरा परिवार गम में डूबा हुआ था। पड़ोसियों का कहना है कि पिछले पांच महीने में सिर्फ हनुमान सैनी ही ड्यूटी पर जाने के लिए निकलता था। इसके तारा और दोनों बेटियां घर से बाहर तक नहीं निकली थीं। हनुमान का ससुराल नवलगढ़ में दरोगा वाली की ढाणी में था।

आत्महत्या के लिए हाल ही में आरसीसी के मकान में लगवाया गाटर, रस्सी भी नई, आखिरी वक्त में भी एक दूसरे का हाथ थामे रहे पति-पत्नी

सुसाइड नोट-बेटा नहीं रहा तो हम क्या करेंगे, अमर का कड़ा व उसके जन्म के बाल अस्थियों के साथ गंगा में बहा देना।

अमर (फाइल फोटो)।

अमर (फाइल फोटो)।

हनुमानप्रसाद सैनी व उसके परिवार ने फांसी लगाने से पहले दो पेज का सुसाइड नोट लिखा है। एक सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं हनुमान प्रसाद सैनी मेरी पत्नी तारा देवी व दो बेटियां पूजा व अन्नू अपने पूरे होश हवास में यह लिख रहे हैं कि हमारे पुत्र अमर सैनी का स्वर्गवास 27 सितंबर हो गया था।

हमने उसके बिना जीने की कोशिश की लेकिन उसके बगैर अब जिया नहीं जाता। इसलिए हम सब चारों ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने का फैसला किया है। अमर हम चारों की जिंदगी था। वहीं नहीं तो हम यहां क्या करेंगे। घर में किसी चीज की कमी नहीं है। जमीन है, घर है, दुकान व नौकरी है। बस सबसे बड़ी कमी पुत्र की है। उसके बिना सब बेकार है। हमारे पर किसी का कोई कर्जा बाकी नहीं है। प्रशासन से निवेदन है कि किसी भी परिवार जनों को परेशान नहीं करें। यह हमारा अपना फैसला है।

दूसरा सुसाइड नोट उसने अपने छोटे भाई सुरेश के नाम लिखा है। जिसमें लिखा है कि सुरेश हम सबका अंतिम संस्कार अपने परिवार की तरह करना। कबीर पंथ की तरह मत करना। सब काम अपने रीति रिवाज से करना और अमर का कड़ा व उसके जन्म के बाल (जड़ूला) हमारे साथ गंगा में बहा देना। अमर के फोटो के पास सब सामान रखा है। सुरेश मेरे उपर किसी का कोई रुपया पैसा बाकी नहीं है।

काश, कई दिन से मौत की इन सिहरा देने वाली तैयारियों में एक दिन बीच में आता परिवार

  • तीन चार दिन पहले ही घर में गाटर लगाई, ताकि सब एक साथ एक जगह फंदे पर लटक सकें
  • यह गाटर छत से कुछ नीचे है, देखकर लगता है कि इसका कोई उपयोग नहीं था, सिर्फ खुदकुशी के लिए लगाई थी। काश उसी वक्त किसी कारीगर या घर के सदस्य ने पूछा होता कि यह क्यों लगवाई?)
  • बाजार से नई रस्सी खरीदकर लाया। जिस रस्सी से चारों लटकें वह एकदम नई है।
  • इसे देखकर लगता है कि चारों ने इसकी भी प्लानिंग की थी। अचानक होता तो चुन्नी या साड़ी का फंदा होता।
  • सबने एक साथ लटकने का फैसला किया, ताकि एक भी कमजोर न पड़े
  • जिस हालात में चारों के शव लटके मिले, उसे देखकर ऐसा लगता है। कमरे में पलंग उल्टा पड़ा मिला। एक कुर्सी भी। अंदेशा है कि चारों ने पहले गाटर पर रस्सियां लटकाई, फिर एक साथ पलंग पर चढ़कर फंदा लगाया। पलंग को धक्का दिया, जिससे वह उलटा गिर गया।)
  • दम टूटने के बाद भी हनुमान ने पत्नी का हाथ पकड़ा हुआ था। दोनों बेटियां एक तरफ व पति-पत्नी एक तरफ झूलते हुए मिले।
  • घर में घटना के समय कोई नहीं था। जूठे बर्तन मिले। जिसे देखकर लगता है कि सबने एक साथ खाना खाया। परिजनों के अनुसार, चारों एक साथ ही खाना खाते थे।)
  • काश परिवार का कोई सदस्य, पड़ोसी या दोस्त इनके साथ बिताता, इन्हें पढ़ता, इनका दर्द साझा करता तो यह परिवार हमारे बीच होता।

बेटे की मौत के बाद कबीर पंथ से भी मोह भंग

चचेरे भाई कपिल सैनी ने बताया कि हनुमानप्रसाद के परिवार ने 20 साल पहले कबीर पंथ अपना लिया था। अमर की मौत के बाद सिर्फ लोहार्गल गए थे। 15 दिसंबर 2020 को कबीर पंथ के गुजरात के एक संत साहिबजी को बुलाया था। इसके बाद उनका मन बदला गया। कुछ माह पहले ही उन्होंने कबीर पंथ छोड़ दिया था।

प्रत्यक्षदर्शी : न दरवाजा खोला, न ही फोन उठाया, तो शक हुआ

हनुमानप्रसाद सैनी के चचेरे भाई प्रत्यक्षदर्शी कपिल सैनी ने बताया कि रोजाना की तरह शाम को घर पर दूध देने वाला आया। दूधवाला हनुमान का रिश्तेदार ही है। दरवाजा खटखटाया तो किसी ने जवाब नहीं दिया। इसके बाद दूधवाले ने हनुमानके मोबाइल पर फोन किया। हनुमान ने फोन नहीं उठाया तो दूधवाले ने हनुमान के छोटे भाई घनश्याम के बेटे युवराज को फोन किया जो अमर की मौत के बाद से हनुमान के पास ही रहता था।युवराज ने अपने पिता व चाचा कपिल सैनी को मोबाइल पर कॉल किया। घटना पर सबसे पहले हनुमान के चचेरे भाई कपिल सैनी व सगा छोटा भाई घनश्याम पहुंचे। उसने मकान का मुख्य दरवाजा खोलकर अंदर के लकड़ी के गेट के धक्का मारा तो वह खुल गया। अंदर कमरे में देखा तो कपिल के होश उड़ गए हनुमानप्रसाद सहित चारों गाटर पर फंदे पर लटके थे। कपिल ने सबसे पहले पुलिस को सूचना दी और इसके बाद परिवार को बुलाया।

पिता बोले- हनुमान सबसूं बड़ो धोखो कर‌्‌यो कि पोत्यां न भी सागै लेगो

पिता बोले- हनुमान सबसूं बड़ो धोखो कर‌्‌यो कि पोत्यां न भी सागै लेगो

मृतक हनुमानप्रसाद के पिता रामगोपाल सैनी रोते हुए कह रहे थे हनुमान ने सबसे बड़ा धोखा किया है, मेरी दोनों बेकसूर पोतियों को भी ले गया। हनुमान तूने हमारे धोला में माटी डाल दी। बुढ़ापे में हमारे गोडे तोड़ गया। तुझे कोई तकलीफ थी तो हमें बताता तो सही। हम तेरा बेटा अमर तो कहां से लाकर देते। रामगोपाल अपनी पत्नी रूक्मणी देवी को ढांढस बंधा रहा था कि तू क्यूं रो री है, हनुमान आपणो होतो तो आपण सागै इंया थोड़ी करतो। हनुमान की बहन मंजू की दो बेटियों की शादी 16 फरवरी को थी। हनुमान का परिवार शादी में नहीं गया था।

हनुमान ने दोनों छोटे भाइयों घनश्याम व सुरेश और पिता रामगोपाल सैनी को कहा था कि बहन मंजू का भात भरकर आओ। एक माह पहले उसकी दादी मोहिनी देवी का देहांत हो गया था। अंतिम दर्शन करने आया था लेकिन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुआ था। हनुमानप्रसाद ने करीब 20 से 22 साल पहले पुराेहितजी की ढाणी में अलग मकान बनाया था। दाेनाें छाेटे भाई घनश्याम सैनी व सुरेश सैनी वहीं मोहल्ले में ही रहते थे। पिता पोते अमर की मृत्यु के बाद बड़े बेटे के घर ही रहते थे।

 

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