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रेगिस्तान में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास: पहली बार अमेरिकी सेना ने रिहर्सल में स्ट्राइकर को उतारा; भारतीय सेना बेहतर तालमेल से कम टाइम में हमला कर चौंकाएगी

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रेगिस्तान में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास: पहली बार अमेरिकी सेना ने रिहर्सल में स्ट्राइकर को उतारा; भारतीय सेना बेहतर तालमेल से कम टाइम में हमला कर चौंकाएगी

 

  • भारत व अमेरिकी सेनाओं के बीच महाजन रेंज में शुरू हुआ युद्धाभ्यास
  • छोटा लेकिन रणनीति स्तर पर बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है यह युद्धाभ्यास

थार के रेगिस्तान में सोमवार से भारत और अमेरिकी सेनाओं के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास शुरू हो गया। युद्धाभ्यास में सेना के दो समूह आपस में मिलकर बेहतरीन तालमेल के साथ कम से कम समय में दुश्मन पर हमला बोल उसे चौंकाने वाली रणनीति का अभ्यास होगा। तेजी से हमला बोल दुश्मन की जमीन पर कब्जा जमाने के लिए अलग-अलग तरह की रणनीतियों के तहत युद्धाभ्यास किया जाएगा। साथ ही आतंकी हमलों से निपटने का भी अभ्यास किया जाएगा।

सामरिक विशेषज्ञों का कहना है कि देखने में भले ही यह युद्धाभ्यास छोटा है, लेकिन इसमें किए जाने वाले प्रयोग दोनों देश की सेनाओं के लिए लंबे अरसे तक कारगर साबित होंगे। भारतीय सेना इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) पर काम कर रही है। उसमें अलग-अलग सैन्य टुकड़ियां एक समूह में एकत्र होकर कम से कम समय में दुश्मन पर हमला करने की रणनीति पर काम करेंगे। इस युद्धाभ्यास में भी इसी रणनीति का अभ्यास होगा। ऐसे में यह युद्धाभ्यास भारतीय सेना को नया अनुभव प्रदान करेगा।

भारत और अमेरिकी सेना के अधिकारी युद्धाभ्यास की रणनीति पर चर्चा करते हुए।

भारत और अमेरिकी सेना के अधिकारी युद्धाभ्यास की रणनीति पर चर्चा करते हुए।

भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व सप्तशक्ति कमान की 11वीं बटालियन व जम्मू और कश्मीर राइफल्स कर रही है। वहीं, अमेरिकी सेना के का प्रतिनिधित्व 2 इन्फैंट्री बटालियन, 3 इन्फैंट्री रेजिमेंट, 1.2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के सैनिक कर रहे है। युद्धाभ्यास के लिए अमेरिकी सेना अपने साथ स्ट्राइकर (बख्तरबंद वाहन) भी लेकर आई है। यह पहला अवसर है जब छोटे स्तर के युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना स्ट्राइकर को काम में लेगी।

अपने स्ट्राइकर के साथ अमेरिकी सैनिक।

अपने स्ट्राइकर के साथ अमेरिकी सैनिक।

ऐसे होगा युद्धाभ्यास

महाजन फायरिंग रेंज में 21 फरवरी तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास में दोनों सेना जमीनी हमलों का अभ्यास करेगी। इस दौरान वास्तविक युद्ध सा माहौल नजर आएगा। सबसे पहले यह देखा जाएगा कि सेना की दो अलग-अलग टुकड़ियां कितने समय में रणक्षेत्र में पहुंच सकती है। इसके बाद दो अलग-अलग प्रकृति की ब्रिगेड के सैनिक किस तरह एक स्थान पर एकत्र होकर आपस में कोर्डिनेशन स्थापित करते है। दोनों बेहतरीन आपसी तालमेल के साथ दुश्मन की जमीन पर हमला कर उस पर कब्जा जमाने का प्रयास करेंगे।

इस दौरान भारतीय और अमेरिकी सेना आमने-सामने होगी। हर बार अलग फोरमेशन में सैन्य टुकड़ियां आगे बढ़ेगी। रणनीति में रोजाना बदलाव होता रहेगा। साथ ही दुश्मन के प्रतिरोध के आधार पर भी रणनीति में बदलाव होता रहेगा। युद्धाभ्यास के दौरान परम्परागत, अपरम्परागत और दोनों के हाइब्रिड मॉडल को आजमाया जाएगा।

इस कारण है महत्वपूर्ण

भारतीय सेना इन दिनों आईबीजी पर काम कर रही है। उसमें अलग-अलग क्षेत्र में महारत रखने वाली सैन्य टुकड़ियों का एक छोटा समूह बनाया जाएगा। यह समूह पूरी तैयारी के साथ बेहतरीन तालमेल बनाते हुए दुश्मन पर हमला बोलेगा। यह युद्धाभ्यास भी इसी तर्ज पर हो रहा है। ऐसे में यहां अलग-अलग रणनीतियों के आधार पर हमला बोलने के तरीकों से दोनों देश की सेना को एक-दूसरे से काफी सीखने को मिलेगा। राजस्थान से सटे सिंध में दो माह पूर्व पाकिस्तान और चीनी सेना के बीच युद्धाभ्यास हो चुका है। वहीं, भारत और अमेरिका हिन्द महासागर में अपना प्रभुत्व बरकरार रखना चाहते है। ऐसे में इस युद्धाभ्यास के महत्व बढ़ जाता है।

ऐसी है अमेरिकी स्ट्राइकर ब्रिगेड

अमेरिकी सेना में नौ स्ट्राइकर ब्रिगेड है। इसमें से सात एक्टिव मोड में और दो नेशनल गार्ड के साथ रहती है। अमेरिका की तरफ से इनकी पूरी दुनिया में तैनाती की जाती रही है। कई महत्वपूर्ण अभियानों में यह टीम हिस्सा ले चुकी है। स्ट्राइकर ब्रिगेड सही मायनों में हल्के हथियार व मध्यम भार वाले बख्तरबंद वाहनों का समूह है। यह इंफैन्ट्री और आर्मड से पूरी तरह अलग होती है। सीमित क्षेत्र में तेजी से हमले बोलने में इन्हें महारत हासिल है।

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