उच्च शिक्षा के तंत्र में कुलपति सचिवालय से लेकर राज्यपाल सचिवालय तक “कुलपति” नाम के शब्द ने हम सभी के जहन में विश्वविद्यालय के मुखिया होने की छाप छोड़ी है। लेकिन प्रदेश के एक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह विश्वविद्यालय के मुखिया होने के साथ मानव सेंवा का धर्म भी बखूबी निभा रहे हैं। फिर बात चाहे विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता की हो या सामुदायिक सेंवा के कार्यों की प्रो.सिंह ने हर मिथक को तोड़ते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति होने के साथ सरोकार के कुलपति के रूप में उन्होंने “आमजन के समक्ष अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया हैं।

उदयपुर संभाग की आशाधाम संस्था में स्वयं के खर्चे पर प्रतिमाह 300 निर्धन, असहाय, बेसहारा, मानसिक विक्षिप्तों,निराश्रितों और बुजुर्गों के परमार्थ निःशुल्क अन्नदान की व्यवस्था करवा कर माननीय मूल्यों और सामुदायिक सेंवा की अद्भुत मिसाल कायम की है। पिछले कई माहों से नियमित रूप से प्रो. सिंह अन्नदान के इस सेंवा प्रकल्प को निरन्तर जारी रखे हुए है। कुलपति स्वयं परिवार सहित प्रतिमाह आशाधाम संस्था में निराश्रितों से आत्मीयता के साथ उनसे मिलते और उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास करते हैं। एक परिवार की तरह कुलपति स्वयं प्रेम और स्नेह से इन्हें भोजन कराते हैं और अपना समय भी उनके साथ व्यतित करते है, उनके इस स्नेह नें दोनों के मध्य भावात्मक संबंधो को बनाया है। आशाधाम के स्थानीय निराश्रित उनके आने का उत्सुकता से इंतजार करते हैं और अपने दु:ख दर्द उनसे सांझा करते हैं।कुलपति सिंह दुवारा भोजन प्रबंध के प्रयासों से प्रतिमाह असंख्य निराश्रितों के चेहरों पर खुशी आई है और लोग इस सेंवा प्रकल्प से लॉकडाउन की इस घड़ी में लाभान्वित हो रहे है।

संस्थान की प्रशासिका सिस्टर डेनियल ने बताया कि संस्थान बीते ढाई दशक से ज्यादा समय से घर से बेघर महिलाओं और पुरूषों का लालन-पालन कर रहा है। वर्तमान में 250 से अधिक लोग यहां निवास कर रहे है। उन्होंने प्रो. सिंह की इस सदाशयता का आभार जताते हुए कहा कि सुविवि कुलपति ने इन निराश्रितों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की जिम्मेदारी को बखूबी उठाया है। बेसहारो का सहारा बनकर प्रो सिंह ने उन्हें भावात्मक सम्बल प्रदान किया हैं। मनोस्थिति से जूझ रहे ऐसे कई लोगों में अलग-अलग प्रतिभाएं छिपी हुई है जिन्हें पुन: प्रयास के माध्यम से निखारा जा सकता है। कुछ माह पूर्व कुलपति प्रोफेसर अमेरिका सिंह आशाधाम संस्था का दौरा कर वहां भूखे असहाय निराश्रितों को देखकर उनके मन में उनके लिए भोजन व्यवस्था करने का जिम्मा उठाने का ख्याल आया।उस दिन के बाद से निरंतर इस कार्य को स्वयं के खर्चे पर जारी रखे हुए हैं।

“प्रो. सिंह ने बताया की व्यक्तिगत जीवन में उनके परिवारिक संस्कारो ने मानवीय सेवाओं को हमेशा प्राथमिकता पर रखने की प्रेरणा प्रदान की है। हमें अपना मानव जीवन दूसरों की मदद के लिए सैदव समर्पित रखना चाहिए। पेशावर और सामाजिक जीवन में मानवीय मूल्यों का समन्वय अवश्य स्थापित किया जाना चाहिए। किसी के प्रति आपका सेंवा भाव आपके तन और मन दोनों को संतोष प्रदान करता हैं। हर व्यक्ति के अपने मानव समाज के प्रति सामाजिक दायित्व है, जिन्हें ईमानदारी से उन्हें निभाना चाहिए। आशाधाम में निराश्रितों के लिए शुरू की गई इस नि: शुल्क भोजन व्यवस्था को भी भविष्य में भी जारी रखेंगे। सभ्य मानव समाज की परिकल्पना को साकार करने हेतु ऐसे असहाय लोगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाना आवश्यक है।”

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