तीसरी लहर में बच्चों में कोरोना के संक्रमण का डर सता रहा है लेकिन इसकी आहट औऱ खतरा दूसरी लहर में ही दिखाई दे रहा है. ब्लेक फंगस के आंतक के बीच कोरोना से ठीक हो रहे बच्चों में एमआईएससी (MISC) बीमारी फैल रही है. न सिर्फ पोस्ट कोविड में कुछ केस में कोरोना सक्रमित बच्चे भी मल्टी सिस्टम इंफेलमेंट्री सिड्रोम इन चिल्ड्रन यानी एमआईएस सी से जूझ रहे हैं. राजस्थान में इस बीमारी से 100 बच्चे पीड़ित हैं जिनमें सबसे अधिक 25 जयपुर में हैं.

राजस्थान में कोरोना से संक्रमित हुए बच्चे ठीक होने के बाद मल्टी सिस्टम इंफलमेंट्री सिंड्रोम इन चाइल्ड बीमारी से जूझ रहे हैं. जयपुर के बच्चों के अस्पाल जेके लोन में इस बीमारी से पीड़ित चार बच्चे भर्ती है जिनमें से एक आईसीयू में है. इस बीमारी में कोरोना से ठीक होने के बाद महीने भर बच्चों में शरीर के कुछ अंगो में सूझन आ जाती है. लाल चकते बन जाते हैं. इस बीमारी के लक्षण यूके में मिली कावासकी बीमारी से मिलते-जुलते हैं लेकिन ये कावासाकी नहीं.

कैसे पहचाने बीमारी के लक्षण
इस बीमारी से पीड़ित बच्चों का इलाज कर रहे डॉ अशोक गुप्ता बताते हैं कि तीन दिन तक तेज बुखार आता है. शरीर लाल चकते, लाल आंखे, पेट दर्द, उल्टी और गंभीर होने पर बीपी लो होना, सांस व हार्ट की गति तेज, लाल मूत्र आना आदि शामिल हैं.
अच्छी बात ये कि अगर समय पर लक्षण पहचान इलाज शुरू कर दिया जाए तो पांच-छह दिन में मरीज ठीक हो सकते हैं लेकिन देरी करने पर खतरा ये कि धमनियों में सूजन आने से आने हार्ट अटैक, किडनी में सूजन आने पर पेशाब में खून निकलना और मस्तिष्क में सूजन आने पर असामान्य व्यवहार जैसी परेशानी आती है.

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