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25 साल की बहन को ऑटो में लेकर जयपुर के 6 अस्पतालों में भटकता रहा भाई, SMS में भी बंद मिले ताले, गेट पर दम तोड़ा, मरने से पहले हाथ जोड़कर कहती रही- मुझे बचा लो

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कोरोना महामारी में राजस्थान में कई गुना तेजी से बढ़ रही संक्रमण की रफ्तार में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। यहां कोरोना पेंशेंट्स के लिए बेड और ऑक्सीजन की किल्लत इतनी हो गई है कि अस्पतालों के गेट बंद कर दिए गए हैं। यहां ताले लगे हैं। नए पेशेंट को भर्ती करने के लिए जगह नहीं बची है। लिहाजा अब लोग ऑक्सीजन के लिए तड़पते हुए अस्पतालों के गेट पर ही दम तोड़ने लगे हैं।

ऐसा ही दर्दनाक वाकया राजधानी जयपुर में देखने को मिला। प्रदेश के सबसे बड़े SMS अस्पताल में शनिवार शाम 6 बजे 25 साल की एक महिला ने अपने भाई और आसपास लाचार खड़े लोगों की आंखों के सामने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। वह हॉस्पिटल के गेट पर एक बैंच पर बैठे-बैठे हाथ जोड़कर कहती रही कि मेरा दम घुट रहा है, मैं मर जाऊंगी, मुझे बचा लो। लेकिन उसे भर्ती करने के लिए इमरजेंसी के गेट नहीं खुले और उसकी करीब 15 मिनट के भीतर मौत हो गई।

इस घटना को देख परेशान हुए लोगों में आक्रोश पैदा हो गया। इनमें कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इसका लाइव वीडियो चला दिया। इस मामले में SMS अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजेश शर्मा का कहना है कि इस घटना की सत्यता की जांच करवाएंगे।

90 किलोमीटर का सफर कर एंबुलेंस से जयपुर पहुंचा, यहां छह हॉस्पिटलों में भटकता रहा
25 वर्षीया मृतका टोंक जिले में निवाई कस्बे में गुंसी गांव की रहने वाली थी। शनिवार को अचानक महिला की तबीयत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में काफी दिक्कत होने लगी। दम घुटने लगा। ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने लगी। बहन की हालत देखकर उसका भाई उसे निवाई और फिर टोंक पहुंचा। यहां कोई मदद नहीं मिली।

तब एंबुलेंस से बहन को लेकर 90 किलोमीटर दूर जयपुर के लिए रवाना हुआ। भाई पूरे रास्ते में बहन को किसी तरह हौसला देता रहा। यहां जयपुर में मालवीय नगर, जगतपुरा, प्रताप नगर में एक ऑटोरिक्शा में बैठाकर पांच अस्पतालों के चक्कर लगाए। बहन को भर्ती करने की गुहार की, लेकिन कहीं बेड और ऑक्सीजन नहीं मिली। पीड़ित भाई के मुताबिक सब हॉस्पिटलों में दरवाजे बंद थे।

हाथ जोड़कर करती रही पुकार- मेरा दम घुट रहा है मुझे बचा लो, मैं मर जाऊंगी
आखिरकार, ऑटोरिक्शा चालक दोनों भाई बहन को लेकर SMS अस्पताल पहुंचा। यहां इमरजेंसी गेट पर दरवाजा बंद मिला। यहां गुहार करने पर जवाब मिला कि सिर्फ RUHS से रैफर मरीज से भर्ती किए जा रहे हैं। इस बीच बहन की सांसें उखड़ती रही। वह हॉस्पिटल के मुख्य गेट पर एक बैंच पर बैठ गई। वहां महिला हाथ जोड़कर आसपास मौजूद लोगों से गुहार करती रही कि मेरा दम घुट रहा है। मुझे बचा लो। मैं मर जाऊंगी। आखिरकार उसने बैंच पर दम तोड़ दिया और निढ़ाल होकर गिर पड़ी। भाई फूट फूट कर रोने लगा। वह व्यवस्थाओं को कोसने लगा।

ऑटो ड्राइवर ने कहा- मालवीय नगर से लेकर SMS हॉस्पिटल लाया हूं, बेचारी ने दम तोड़ दिया
मृतका महिला और उसके भाई को SMS हॉस्पिटल लेकर पहुंचे ऑटोरिक्शा चालक ने बताया कि ये बेचारे गांव से आए थे। मेरे साथ ही चार हॉस्पिटलों में लेकर गए। वहां ताले बंद मिले। तब यहां लेकर आया। यहां भी इमरजेंसी पर ताले लगे मिले। किसी तरह बेचारी महिला ने दम भर रखा था। उसे उम्मीद थी कि वह जिंदा बच जाएगी। उसका इलाज शुरू हो जाएगा, लेकिन इतनी देर चक्कर लगाने के बजाए भी भाई बहन पर किसी ने दया नहीं की। यहां अस्पताल वाले लाचारी दिखाते हुए नियमों में उलझे रहे।

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