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इस तरह लक्षण बदलकर और रहस्यमयी हो रहा कोरोनावायरस, आपके लिए इन खतरनाक वैरिएंट्स का जनाना बेहद जरूरी

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एक ओर सालभर बाद कोरोना भयानक प्रकोप दिखा रहा है. दूसरी ओर ये दिन-ब-दिन रहस्यमयी होता जा रहा है. वैक्सीन आने के बाद भी कोरोना वायरस कमजोर नहीं पड़ा है. बल्कि नए अवतार के साथ हाहाकार मचा रहा है. अब नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि कोरोना के बदलते लक्षण से मेडिकल साइंस भी हैरान हो रहा है. कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवाने के बाद भी लोग कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं.

कोरोना की दूसरी लहर के भीषण कहर के बीच अब तक बड़ी फिक्र यही थी कि वायरस का नया स्ट्रेन पुराने से ज्यादा घातक है. यहां तक कि युवाओं और बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रहा है लेकिन, अब WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अलग-अलग कोरोना संक्रमितों में अलग-अलग लक्षण मिल रहे हैं और भारत में नए मामलों को लेकर जो स्टडी हुई है.उसके अनुसार भी बदलते स्ट्रेन की वजह से लक्षण बदल रहे हैं.

बदल रहे कोरोना के लक्षण

अभी तक हम-आप सभी लोग यही जानते-समझते रहे कि कोरोना के लक्षण- बुखार, थकान, सर्दी-जुकाम, स्वाद और गंध का नहीं आना है लेकिन, अब जो लक्षण सामने आ रहे हैं. वो हैं- पेट दर्द, उल्टी, दस्त, भूख में कमी, कमजोरी और जोड़ों का दर्द. नई रिपोर्ट के मुताबिक ब्राजील और केंट के कोरोना वैरिएंट्स ज्यादा ताकतवर हैं और इनकी वजह से नए तरह के लक्षण सामने आ रहे हैं.

इससे पहले यूके और दूसरे यूरोपीय देशों में कोरोना की दूसरी और तीसरी लहर के दौरान बुखार या खांसी के अलावा भी कुछ लक्षण सामने आए थे लेकिन, अब भारत में भी डॉक्टर बुखार और खांसी जैसे सामान्य लक्षण न होने के बाद भी टेस्ट करवाने की सलाह दे रहे हैं और मरीज पॉजिटिव आ रहे हैं. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के डॉक्टरों ने भी मरीजों में कोरोना के बदले लक्षण देखे हैं.

18 राज्यों में मिले कोरोना के खतरनाक वैरिएंट्स

भारत सरकार की मानें तो इस समय देश के 18 राज्यों में कोरोना के खतरनाक वैरिएंट्स मिले हैं. इनमें महाराष्ट्र में मिला डबल म्यूटेंट स्ट्रेन भी शामिल है. महाराष्ट्र में जो केस सामने आए हैं. उनमें वायरस में दो जगहों पर बदलाव हुए हैं. इससे इसकी ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ी है यानी तेजी से संक्रमण फैल रहा है, जिसके चलते सूबे में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगी हैं. पुणे में एक भी वेंटिलेटर खाली नहीं है और अब सिर्फ 376 ऑक्सीजन बेड ही खाली बचे हैं, जबकि प्रतिदिन यहां 5-6 हजार से ज्यादा नए केस मिल रहे हैं. पुणे में हालात इतने खराब हैं कि सेना की मदद मांगी गई है.

इंदौर में दवा की दुकानों पर रेमडेसिविर के लिए ऐसी भीड़ उमड़ी कि किसी को कोरोना वायरस का ख्याल नहीं रहा. इस भीड़ में कोविड प्रोटोकॉल का कचूमर निकल गया. एक इंजेक्शन लेने के चक्कर में लोग ये भूल गए कि सोशल डिस्टेंसिंग किस चिड़िया का नाम है. कोरोना के गंभीर मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन की 6 खुराक दी जाती है लेकिन, इस वक्त महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, मध्य प्रदेश जैसे कोरोना प्रभावित राज्यों में इसकी डिमांड बढ़ गई है, जिसके चलते इसकी कालाबाजारी भी शुरू हो चुकी है.

कोरोना के दौर में भी हो रही कालाबाजारी

कालाबाजारी का आलम ये है कि 750 से 1400 रुपये तक के होलसेल रेट वाले इंजेक्शन की बाजार में कीमत 1200 से लेकर छह हजार रुपये तक वसूली जा रही है. इसलिए कलेक्टर ने आदेश दिए हैं कि अब रेमडेसिविर इंजेक्शन लेने के लिए कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट के साथ आधार कार्ड और डॉक्टर की डिमांड पर्ची दिखानी होगी. अहमदाबाद में भी रेमडेसिविर के लिए सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. लोग कोरोना से बेखौफ अपनों की जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं.

देश की राजधानी दिल्ली में भी बीते 7 दिनों का औसत देखें तो यहां रोजोना कोरोना से 15 लोगों की जान जा रही है, जिसके चलते यहां के निगम बोध घाट पर एक बार फिर 20 प्लेटफॉर्म यानी भट्ठी या चिता स्थल को रिजर्व कर दिया गया है. हालांकि पिछले पीक में यहां 50 प्लेटफॉर्म कोराना मरीजों के शवों के लिए रिजर्व किए गए थे.

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