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बीकानेर में हर साल टीबी के कारण दम तोड़ देते हैं 200 रोगी, आंकड़ों में सुधार हुआ लेकिन उम्मीद से कम

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टीबी यानी क्षय रोग को खत्म करने के राज्य व केंद्र सरकार के प्रयासों से आंकड़ों में तो सुधार हुआ है लेकिन हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं कहे जा सकते। बीकानेर में ही हर साल करीब दो सौ रोगियों की मौत TB के कारण हो जाती है। स्वयं चिकित्सा विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस रोग को जड़ से खत्म करना केंद्र सरकार की तय समय सीमा में संभव नहीं है। बीकानेर में वर्ष 2020 में 5159 TB राेगी सामने आए थे, जिसमें 4385 ठीक भी हो गए। इस बीच 204 की मौत हो गई। चिकित्सा विभाग के लिए यह आंकड़े चिंताजनक ही है क्योंकि कोरोना जैसी अत्यंत खतरनाक बीमारी से ही पिछले साल 167 रोगियों की मौत हुई थी। दोनों के आंकड़ों में बहुत बड़ा अंतर नहीं है।

इन क्षेत्रों में है टीबी का असर

जिले के खाजूवाला, बीकानेर, श्रीकोलायत, लूणकरनर, बज्जू, श्रीडूंगरगढ़ नोखा व नापासर में टीबी रोगियों की संख्या अधिक है। ऐसे में इन क्षेत्रों में टीबी यूनिट स्थापित है। इन्हीं क्षेत्रों से हर साल पांच से छह हजार रोगी सामने आ रहे हैं। संक्रामक रोग होने के कारण एक ही क्षेत्र में टीबी रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी होती रही है।

जांच के लिए बनी लेब

बीकानेर में टीबी नियंत्रण के लिए करीब छह करोड़ रुपए की लागत से एक लैब का भी निर्माण हुआ है। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की यह लैब अब तक शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान में टीबी से जुड़ी जांच के लिए सेम्पल जोधपुर भेजने पड़ते हैं। लैब के शुरू होते ही यह काम बीकानेर में ही हो सकेगा।

संभाग के अन्य जिलों में भी TB

बीकानेर संभाग के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ व चूरू जिले में भी TB का प्रकोप आज तक है। इन जिलों में भी हर साल सौ से दो सौ के बीच रोगियों की मौत हो रही है। ऐसे में इन रोगियों का इलाज भी अब बीकानेर के TB मुख्यालय के अधीन कर दिया गया है।

ये रोगी रखें विशेष ध्यान

TB उन रोगियों के लिए ज्यादा घातक है, जो पहले से डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे लोगों में TB का प्रभाव ज्यादा होता है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे रोगियों को संक्रामक बीमारियों से दूर रहना चाहिए।

भारत में TB की स्थिति

वर्ष 2020 में दुनियाभर में एक करोड़ रोगी चिन्हित किए गए थे, जिसमें 26.04 लाख रोगी अकेले भारत में थे जो कुल रोगियों का 26 फीसदी है। दुनियाभर में 12.10 लाख रोगियों की मौत हो गई, इसमें 4.36 लाख की मौत अकेले भारत में हुई। ऐसे में दुनिया में TB के 36 फीसदी रोगियों की मौत तो भारत में ही हो रही है। जो संभवत: दुनिया में सर्वाधिक है। दुनियाभर में 11.90 लाख बच्चों में TB हुआ, जिसमें 3.33 लाख बच्चे भारत के थे। यह आंकड़ा भी चिंताजनक है। दरअसल, विश्वभर के TB से ग्रसित बच्चों में 28 फीसदी बच्चे भारत के हैं।

इनका कहना है

नि:संदेह TB पर अब तक नियंत्रण नहीं पा सके हैं। सुखद खबर यह है कि आंकड़े लगातार कम हो रहे हैं। यह संक्रमण से फैलने वाली बीमारी है, इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है। रोगियों के परिजनों को बचाने के लिए भी केंद्र सरकार नई योजना ला रही है। हमारा लक्ष्य 2035 तक टीबी को समूल नष्ट करना है।

-डॉ. सी.एस. मोदी, जिला क्षय अधिकारी, बीकानेर

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