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17 साल पहले की गई 11 करोड़ की गलती, अब सुधारने में खर्च होंगे 11 करोड़

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उदयपुर: 17 साल पहले की गई 11 करोड़ की गलती, अब सुधारने में खर्च होंगे 11 करोड़

उदयपुर में अधिकारियों ने 17 साल पहले 11 करोड़ रुपये लगाकर की गई गलती को अब सुधारने के लिए फिर 11 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे. सीवरेज में लीकेज से गंदगी झील के पानी में मिलने लगी थी. अब झीलों को स्वच्छ करने के लिये सीवरेज लाइन बाहर निकालने का रिपेार्ट बनाई गई है. दुनिया की खुबसुरत झीलों में शुमार पिछोला झील इन दिनों बदहाली के आंसु रो रही है. इस झील की खुबसुरती पर बदनुमा दाग लगा हैं, इसमें डाली गई सिवरेज लाइन से. पिछोला झील में 17 साल पहले करीब 11 करोड़ की लागत से 22 मीटर सीवरेज लाइन डाली गई थी. इस सीवरज लाइन में लीकेज होने से पिछोला झील में शहर की गंदगी समाहित होने लगी. फिर शहरवासी इस गंदे पानी को पी रहे थे. इस लाइन को जब झील में डाला जा रहा था. तब इसका विरोध हुआ लेकिन नये प्रयोग के तौर पर इस कार्य को कर दिया गया. झील में करीब 28 ऐसी जगह चिह्नित की गई जहां से गंदा पानी झील में समाहित हो रहा था.

झील में समाहित हो रहा हैं ​सीवरेज का गंदा पानी
झील भरी होने पर सीवरेज से लाखों लीटर स्वच्छ पानी व्यर्थ हो रहा था. अब कलेक्टर द्वारा बनाई गई 6 सदस्यीय कमेटी ने रिपेार्ट सौंपी. रिपेार्ट में तीप पंपिंग स्टेशन और 60 मेनहोल बनाकर झील को सीवर मुक्त करने का सुझाव दिया. पिछोला झील में लगातार सीवरेज का पानी समाहित हो रहा था. ऐसे में शहरवासियों का विरोध और झील संरक्षण मंच की मांग पर जिला कलक्टर ने झील का दौरा किया.

जिला कलेक्टर ने ​झील में डाली सीवरेज लाइन पर आश्चर्य जताया और इसे बाहर निकालने के प्रयासों पर अधिकारियों की एक कमेटी बनाई. कमेटी के सदस्यों ने रिपोर्ट तैयार करके तय समय पर जिला कलक्टर को सौंप दी हैं. इस रिपोर्ट में बताए गए तीन पंपिंग स्टेशन और 60 मेनहोल बनने के बाद ही झील में बनी सीवरेज लाइन को ध्वस्त करने का कार्य किया जाएगा. जिला कलक्टर ने बताया कि पुरे शहर में सीवरेज पर कार्य चल रहा हैं. इसी के साथ पिछोला झील में भी जल्द ही सीवर लाइन को बाहर निकालने का प्रयास किया जाएगा.

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