संविधान में लिखा है हिंदी राजभाषा परंतु कई खास काम इंग्लिश में ही

संविधान में लिखा है हिंदी राजभाषा परंतु कई खास काम इंग्लिश में ही
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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 343 (1) कहता है कि संघ की राजभाषा हिंदी है तथा उसकी लिपि देवनागरी है। संघ के शासकीय काम में उपयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतराष्ट्रीय रूप है। वहीं राजभाषा अधिनियम की धारा 3 कहता है कि भले ही राजभाषा हिंदी है परन्तु हिंदी के अतिरिक्त इंग्लिश भाषा का प्रयोग भी सरकारी कामकाज में किया जा सकता है। संविधान का अनुच्छेद 120 कहता है कि संसद का कामकाज हिंदी या अंग्रेजी में किया जा सकता है। परन्तु राज्यसभा के सभापति या लोकसभा के अध्यक्ष विशेष परिस्थिति में सदन के किसी सदस्य को अपनी मातृभाषा में सदन को संबोधित करने की अनुमति दे सकते हैं।

कालजयी साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र के शब्दों में निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय का सूल।।

अर्थात् मातृभाषा के विकास बिना किसी भी समाज की तरक्की संभव नहीं है। अपनी भाषा के ज्ञान के बिना मन की पीड़ा को दूर करना भी मुश्किल है।

सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में इंग्लिश अनिवार्य

अनुच्छेद 348 कहता है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्टों में सभी कार्यवाहियां सिर्फ इंग्लिश में ही होंगी। हालांकि इस अनुच्छेद में राजभाषा हिंदी या प्रदेशिक भाषा को थोड़ी राहत दी गई है। यहां आगे कहा गया है कि खंड (1) के उपखंड (क) में किसी बात के होते हुए भी, किसी राज्य के राज्यपाल या राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस हाईकोर्ट की कार्यवाहियों में, जिसका मुख्य स्थान उस राज्य में है, हिन्दी भाषा का या उस राज्य के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाली किसी अन्य भाषा का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा। परंतु इस खंड की कोई बात ऐसे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए किसी निर्णय, डिक्री या आदेश को लागू नहीं होगी। यहां भी परंतु का इस्तेमाल कर इंग्लिश को अनिवार्य कर दिया गया।

एनडीए व सीडीएस जैसी परीक्षाओं इंग्लिश अनिवार्य

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी तथा संयुक्त रक्षा सेवा जैसी कई परीक्षाओं में इंग्लिश भाषा अनिवार्य है। इतना ही नहीं संघ लोक सेवा आयोग द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा की मुख्य परीक्षा में एक प्रश्न पत्र इंग्लिश का अनिवार्य होता है। इस परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों की शेष विषयों की उत्तर पुस्तिका नहीं जांची जाती भले ही वह कितना भी प्रतिभाशाली हो। बिना मूल्यांकन के ही उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

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Article 343(1) of the Indian Constitution states that the official language of the Union is Hindi and its script is Devanagari. The form of numerals used in the official work of the Union is the international form of Indian numerals. At the same time, Section 3 of the Official Language Act states that even though the official language is Hindi, but in addition to Hindi, English language can also be used in official work. Article 120 of the Constitution states that the business of Parliament may be transacted in Hindi or in English. Provided that the Chairman of the Rajya Sabha or the Speaker of the Lok Sabha may, in special circumstances, permit a member of the House to address the House in his mother tongue.

In the words of classical litterateur Bharatendu Harishchandra, my language is progress, the root of all progress.

Without the knowledge of my own language, the solution of not being lost.

That is, progress of any society is not possible without the development of mother tongue. It is also difficult to remove the pain of the mind without the knowledge of its language.

English compulsory in Supreme Court and High Court

Article 348 states that all proceedings in the Supreme Court and the High Courts shall be in English only. However, in this article some relief has been given to the official language Hindi or the regional language. It is further stated that notwithstanding anything contained in sub-clause (a) of clause (1), with the previous concurrence of the Governor or the President of any State, in the proceedings of the High Court having its principal seat in that State, the Hindi language shall be or authorize the use of any other language to be used for the official purposes of that State. Provided that nothing in this section shall apply to any judgment, decree or order made by such High Court. Here also English was made compulsory using but.

English compulsory for exams like NDA and CDS

English language is compulsory in many examinations like National Defense Academy and Combined Defense Services conducted by the Union Public Service Commission. Not only this, a question paper of English is mandatory in the main examination of the Indian Administrative Service by the Union Public Service Commission. The students who fail in this test are not checked the answer sheets of the remaining subjects, no matter how talented they are. Without evaluation, he is shown the way out.