आज भी अधूरी -अधूरी लगती है आजादी कुछ ओछी सोच और मानसिकता के कारण

आज भी अधूरी -अधूरी लगती है आजादी कुछ ओछी सोच और मानसिकता के कारण
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आज भी अधूरी -अधूरी लगती है आजादी कुछ ओछी सोच और मानसिकता के कारण

कहीं भेद भाव, कहीं छुआछूत, कहीं कहीं धार्मिक सांप्रदायिकता तो कहीं ओछी मानसिकता का परिचय देते हैवान जिनका शिकार सिर्फ अबोध बच्चे होते आए हैं और ये देश के पढ़े लिखे सुदृढ़ समाज के लोगों की हक़ीक़त हैं।
एक और जहां सम्पूर्ण भारतवर्ष में आजादी का अमृत महोत्सव यानी 75 वा स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है, वहीं अगर अंदर की तस्वीर झांके तो कितनी भयावह और सहमाने वाली लगती है।


देश के हर राज्य, जिले, तहसील, गांव और कस्बे के बीच अगर हम खुद जीकर देखे तो आभास होता है कि कितना दर्द, कितनी यातनाएं कितनी कुप्रथाएं और न कितनी असमानताएं है जो आज भी अपनी जड़े पकड़े हुए हैं।


बहुत तकलीफ़ होती है मन सहम जाता है, जब एक पढ़े लोगों की ये मानसिकताएं सामने आती हैं किसी अप्रिय घटना के रुप में, अन्यथा शासक वर्ग शोषण करता रहता है और लोग शोषित होते रहते हैं।
*क्या जात पात ईश्वर ने बनाई हैं?
*क्या जाति और धर्म से जुड़ी खोखली मान्यताएं ईश्वर ने बनाई हैं?
*क्या एक सक्षम निर्बल को ऐसे ही प्रताड़ित करता रहेगा?
*क्यों मुक्त नहीं होना चाहता इंसान अपनी ओछी   मानसिकता से?
*क्यों हम भूल रहे हैं कि सृष्टि के सभी जीवों में एक ही परम सत्य की झलक है।


देश आज़ाद सिर्फ़ बाह्य गुलामी से हुआ हम आज भी समय समय पर अपनी सुविधा हेतु बनाई गई मान्यताओं के गुलाम बन कर ही जी रहे हैं। जिनमें समय के साथ बदलाव आना जरुरी था, पर आज भी ये वैसे ही अपना आस्तित्व स्थापित किए हुए हैं जैसे पहले थी।
"क्या सच में हम आज़ाद हैं"....??

सभी देश वासियों को आजादी के 75 वे अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं