राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिये तेज हुआ संघर्ष, PM समेत सभी 25 सांसदों को लिखा पत्र

 

जोधपुर. राजस्थानी भाषा (Rajasthani language) की मान्यता की मांग को लेकर संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है. राजस्थानी भाषा की मान्यता की मांग को लेकर अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर रविवार को मायड़ भाषा संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) के अलावा राजस्थान के सभी 25 सांसदों को पत्र लिखा है. समिति ने संकल्प लिया है कि जब तक राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिल जाती तब तक वह नियमित रूप से सक्रिय रहेगी. इसके लिये अलग-अलगे तरीकों से आंदोलन भी किया जायेगा.

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मायड़ भाषा संघर्ष समिति ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान प्रदेश के सभी 25 सांसदों को राजस्थानी भाषा में पत्र भेज कर जल्द से जल्द इसे मान्यता दिलवाने का आग्रह किया है. मायड़ भाषा संघर्ष समिति की अध्यक्ष तरनीजा मोहन राठौड़ और उनकी टीम ने सभी सांसदों को अलग-अलग पत्र लिखा है. समिति की टीम ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षर करके राजस्थानी भाषा में इस पत्र को भेजा है.

लंबे समय से संघर्ष किया जा रहा है
मायड़ भाषा संघर्ष समिति की अध्यक्ष तरनीजा मोहन राठौड़ ने बताया कि करीब सात करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में अभी तक शामिल नहीं किया गया है. इसको लेकर लंबे समय से संघर्ष किया जा रहा है. लेकिन अभी भी राजस्थानी भाषा का मुद्दा आगे नहीं बढ़ पाया है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तो वर्ष 2003 में ही विधानसभा में प्रस्ताव पास करके केन्द्र सरकार को भेज दिया था. बीजेपी ने भी अपने घोषणा-पत्र में राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने का उल्लेख किया था. लेकिन अभी तक राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिल पाई है.समिति में ये लोग हैं शामिल

इस दौरान समिति से जुड़े सदस्यों शिवानी राठौड़, खुशी शेखावत, सीमा राठौड़,खुशी पुरोहित, निर्मला राठौड़, ममता कंवर, ओम कंवर, पूनम रावलोत, हर्षिता राठौड़, दीपा पारेख, हेमा गहलोत, विनीता,अंकिता शर्मा, सरिता राठौड़, रेनू शेखावत और रेनू भाटी ने राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने तक सक्रिय रहने का संकल्प लिया.

 

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