भारत अमेरिका युद्धाभ्यास: हेलीकाॅप्टर-टैंक से आतंकियाें के ठिकानाें पर हमला, स्पेशल फाेर्स कमांडाे ने भी साधे निशाने, नतीजा-आतंकी ढेर, बंधक मुक्त

 

भारतीय-अमेरिकी सैनिकों ने युद्धाभ्यास में यूं तबाह किए दुश्मन के ठिकाने। (फोटो : मनीष पारीक)

  • 54 घंटे वेलिडेशन एक्सरसाइज में जुटी रहीं भारत व अमेरिका की सेनाएं, धमाकाें से थर्राई महाजन फायरिंग रेंज
  • भास्कर खास; एक्सपर्ट बता रहे हैं वेलिडेशन एक्सरसाइज और इस अभ्यास से भारतीय सेना काे हुए फायदे के बारे में

सेना काे सूचना मिली कि कतरियासर (काल्पनिक गांव) में कुछ आतंकी घुस आए हैं और उन्हाेंने ग्रामीणाें काे बंधक बना लिया है। उनके पास खतरनाक हथियार भी हैं। इस सूचना पर भारत और अमेरिकी सेनाओं ने रैकी की और हमले की रणनीति बनाई। शनिवार सुबह पाै फटने से पहले ही स्पेशल फाेर्स के कुछ कमांडाे काे हेलीकाॅप्टर से गांव के पास एक सुनसान जगह उतारा गया।

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सैनिक दबे पांव आगे बढ़े और गांव में चाराेें तरफ फैल गए। सेना के आने की आहट मिलते ही आतंकी गाेलियां चलाने लगे। यह देख दाेनाें देशाेें के सैनिक सावधानी बरतते हुए उस घर तक पहुंचे, जहां 5-7 आतंकी छिपे थे। घर काे चाराें तरफ से घेरकर सैनिक आतंकियाें पर टूट पड़े। दाेनाें देशाें के टैंक गरज उठे। उन्हाेंने आतंकियाें के ठिकाने और हथियार नष्ट कर दिए।

हेलीकाॅप्टर से भी गाेलियां दागी गई। भारत-अमेरिकी सैनिकाें ने आतंकियाें काे मारकर गांव वालाें काे मुक्त कराया। भारत-अमेरिका के बीच चल रहे संयुक्त युद्धाभ्यास का यह अंतिम चरण था। दोनों देशों के सीनियर अफसरों ने इसे एक युद्ध की तरह ही प्लान किया। लगातार 54 घंटे चली यह एक वेलिडेशन एक्सरसाइज शुक्रवार सुबह शुरू हुई थी। इसके लिए दोनों देशों के सैनिकाें को अलग अलग टुकड़ियाें में बांटा गया। उन्हाेंने सबसे पहले हाउस क्लीरियरिंग ड्रिल, फिर कार्डन एंड ऑपरेशन, राेड ओपनिंग, काउंटर आईडी ड्रिल का अभ्यास किया।
तूफान की तरह आए टैंक व हैलीकाॅप्टर

युद्धाभ्यास के अंतिम चरण में अमेरिकी टैंक स्ट्राइकर व भारत का सारथी और हैलीकाॅप्टर्स रेतीले धाेराें पर किसी तूफान की तरह आए। चाराें ओर धूल का गुबार छा गया। गाेलियाें व टैंक के गाेलाें की आवाज से फायरिंग रेंज गूंज उठी। दाेनाें देशाें के सैनिकाें ने दुश्मन के हर ठिकाने काे नेस्तनाबूत कर दिया। करीब एक घंटे तक चली फायरिंग से आसपास के ग्रामीण भी सहमे रहे, क्याेंकि रेंज में एक साल बाद बम के धमाके गूंजे थे। काेराेनाकाल में सेना की काेई एक्सरसाइज रेंज में नहीं हाे सकी।

वेलिडेशन एक्सरसाइज
यह दोनों देशों के सैनिकाें द्वारा सीखे गए गुर को आजमाने की अंतिम कड़ी है। युद्धाभ्यास में दोनों देशों ने एक दूसरे के हथियारों को चलाने का प्रशिक्षण लिया। इस एक्सरसाइज में इन सब हथियारों का उपयोग किया गया। हर टुकड़ी में दोनों देशों के जवान हैं, ऐसे में कोई भी दिक्कत आने पर एक-दूसरे का सहयोग भी किया। जवानों ने अभ्यास के दौरान कितना सीखा, इसका ट्रायल इसी दौरान होता है, इसीलिए इसे वेलिडेशन एक्सरसाइज कहते हैं।

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में युद्धाभ्यास के दौरान टारगेट की ओर बढ़ते अमेरिकी सैनिक।

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में युद्धाभ्यास के दौरान टारगेट की ओर बढ़ते अमेरिकी सैनिक।

युद्धाभ्यास में इन हथियाराें काे आजमाया

अमेरिका सेना ने स्नाइपर राइफल्स, हैवी और लाइट मशीनगन, दुनिया का सबसे छाेटा ड्राेन ब्लैक हाॅनेर्ट, वायरलेस सिस्टम, बख्तरबंद गाड़ियाें के साथ स्ट्राइकर टैंक का उपयाेग किया। वहीं भारतीय सेना ने सारथी टैंक, राॅकेट लाॅन्चर, राइफल्स और मशीनगन का उपयाेग किया। अमेरिकी सेना का प्रतिनिधित्व दाे इंफ्रेंटी बटालियन, तीन इंफेंट्री रेजिमेंट, 1.2 स्ट्राइकर बिग्रेड काॅम्बैट टीम के सैनिक कर रहे है। भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व सप्तशक्ति कमान की 11वीं बटालियन व जम्मू व कश्मीर राइफल्स कर रही है। रविवार काे क्लाेजिंग सेरेमनी हाेगी।

निवार सुबह पाै फटने से पहले ही स्पेशल फाेर्स के कुछ कमांडाे काे हेलीकाॅप्टर से गांव के पास एक सुनसान जगह उतारा गया।

निवार सुबह पाै फटने से पहले ही स्पेशल फाेर्स के कुछ कमांडाे काे हेलीकाॅप्टर से गांव के पास एक सुनसान जगह उतारा गया।

संयुक्त युद्धाभ्यास की तीन महत्वपूर्ण बातें
1. भारत-अमेरिकी सेनाएं यूएन शांति सेना के अधीन काम कर रही हैं। ऐसे जॉइंट ऑपरेशन इस बात के प्रमाण हैं कि जब कभी और जहां भी जरूरत पड़ेगी इन सेनाओं को एक साथ भेजा जा सकेगा।
2. जब दो देश साथ में युद्धाभ्यास करते हैं तो दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे को समझने का अवसर मिलता है। उन्हें एक-दूसरे के हथियारों को परखने का मौका मिलता है। ताकि पड़ने पर वास्तविक लड़ाई में दोनों एक-दूसरे की मदद कर सकें।
3. संयुक्त युद्धाभ्यास दुश्मन का पता लगाकर उसे मारने की दिशा को तय करता है। दुश्मन की सूचना मिलने के बाद कौशिश यही रहती है कि जल्दी से जल्दी उसके ठिकाने पर पहुंचा जा सके। संयुक्त अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने इस रणनीति पर काफी एक्सरसाइज की है।