बिश्नोई आत्महत्या प्रकरण में महिला नेत्री सहित कइयों का मोबाइल जब्त, जांच में जुड़ सकते हैं नये तथ्य

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बीकानेर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विष्णुदत्त आत्महत्या प्रकरण की सीबीआई को जांच सौंपने के फैसले के अगले ही दिन इस सिलसिले में पुलिस की जांच तेज हो गई है और अब जो सामने आ रहा है, उसमें राजनीति का दखल और बढ़ गया है। बता दें कि पहले यह मामला भ्रष्टाचार के चलते तनाव में आने से जुड़ा था, लेकिन अब इस जांच की दिशा ही बदल गई है। हालांकि, पहले भी विधायक कृष्णा पूनिया द्वारा बिश्नोई पर लगाए गए आरोपों से इस प्रकरण को जोड़ते हुए यह कहा जा रहा था कि बिश्नोई गंदी राजनीति और कमजोर अधिकारियों के कारण तनाव में आ गए थे, लेकिन अब पुलिस ने जिस तरह से जांच की गति बढ़ाई है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि इस प्रकरण में एक टर्निंग-प्वाइंट आ सकता है।

पूर्व संसदीय सचिव विश्वनाथ मेघवाल की धर्मपत्नी विमला के साथ पुलिस की लगभग एक घंटे तक इसी मुद्दे पर बात हुई है और ऐसा माना जा रहा है कि इस बातचीत में कुछ ऐसा निकलकर आएगा, जिससे जांच के लिए नये तथ्य जुड़ जाएं। पुलिस द्वारा मोबाइल जब्त करने की कार्रवाई भी की गई है, जो इस पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रही है। इस बीच पता चला है कि पुलिस ने सिर्फ यहीं नहीं, बल्कि गंगाशहर, सुजानगढ़ और चूरू में भी इसी तरह की पूछताछ की है। बीकानेर का नंबर तो सबसे बाद में लगा है। हालांकि, मामला हाइ-प्रोफाइल होने की वजह से पुलिस अभी कुछ कहने से बच रही है, लेकिन बताया जाता है कि इस पूरे प्रसंग में अब जांच एक मोड़ ले चुकी है, जहां कुछ और परतें उघड़ेंगी।

बता दें, विष्णुदत्त बिश्नोई ने दो सुसाइड नोट लिखे थे। दोनों में ही उन्होंने किसी को भी अपनी आत्महत्या का जिम्मेदार नहीं ठहराया था। इसके बाद जांच की मांग उठी तो पहले क्राइम ब्रांच को जांच दी गई, जो जारी है। इस बीच बार-बार इस प्रकरण की जांच सीबीआई से करवाने की मांग के चलते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस पर भी राजी हो गए। अभी जांच शुरू ही नहीं हुई है कि यह एक नया मोड़ आ गया है। विमला मेघवाल एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता है, कॉलेज व्याख्याता हैं और स्काउट गाइड की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में उन्हें एक संभावनाशील महिला नेत्री के रूप में भी देखा जाता है, जिनके लिए लोकसभा से टिकट दिलाए जाने की भी पैरोकारी हो चुकी है। विमला मेघवाल के पति डॉ.विश्वनाथ खाजूवाला से विधायक व राजस्थान विधानसभा में पूर्व संसदीय सचिव रहे हैं और अपनी साफ-सुथरी राजनीति की वजह से पहचाने जाते हैंं। इससे पहले इस प्रकरण में विधायक कृष्णा पूनिया टारगेट पर थीं।

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