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बाजार खुलने की  बात पर प्रशासन दो दिन में निर्णय लेगा

बीकानेर, 23  जुलाई।  कोरोना पॉजिटिव के बढ़ाते ग्राफ को लेकर कोटगेट एवं अन्य क्षेत्रों के बाजार कई दिनों से बंद पड़े हैं. व्यापारियों में इसको लेकर बहुत नाराजगी है तथा प्रशासन तक व्यापारियों ने अपने बात भी पहुंचाई है।  जानकार लोगों का कहना है कि  कुछ दिन बाजार खुलने के कारण ही कोरोना का विस्तार जबरदस्त रूप से हुआ उसको नियंत्रित्र करने के लिए आवश्यक है की सभी लोग सहयोग करें।
बीकानेर में बाजार खुलने के लिए लगातार स्थानीय व्यापारी बात कर रहे हैं, तथा शुक्रवार से बाजार खुलने की कुछ अफवाहें भी हुई। इस पूरे मामले पर एक अखबार को  कलक्टर नमित मेहता ने  कहा कि कल से बाजार खुलने का अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। मेहता ने कहा कि व्यापारियों के साथ इस मुद्दे पर प्रशासन सहानुभूति पूर्वक साथ है लेकिन कोरोना नियंत्रण को लेकर उठाये गए कदमों को लेकर इस पर विचार किया जाएगा। आने वाले एक दो दिन में इस पर निर्णय होगा। उम्मीद की जा रही है कि सोमवार तक कुछ बाजारों को खोला जा सकता है। फड़ बाजार को ऑड इवन फामूर्ले पर खोलने पर विचार किया जा रहा है।

इधर व्यापारियों का  यह सन्देश सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है

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” 35 लाख में 100-150 लोगों का कोरोना पॉजिटिव आना, ये विस्फोट है या काम-धंधे को बंद करने का प्लान। कुछ नही होगा किसी को, ठीक हो जाएंगे। यूं भी एक बार सबको होगा। या होकर कई लोग ठीक हो चुके हैं। 100 मे से 1 के नुकसान की आशंका मे 99 को भूखे नहीं मारा जा सकता। कोरोना को जितनी हवा देनी थी दे ली। अब रोजी-रोटी का सोचो। नहीं तो बहुत जल्द कोरोना से “को” हट जाएगा और केवल रोना ही बचेगा। डर के आगे ही जीत है।

यह धारणा पूरी तरह अवैज्ञानिक है कि ऑड, इवन या राइट, लेफ्ट से कोरोना फैलेगा या रुकेगा। इससे कोरोना फैले ना फैले अवसाद,हिंसा,प्रतिहिंसा,बेरोजगारी,महंगाई, लूट-खसौट, चोरी-डकैती निश्चित फैलेगी। इसकी चेन तो साल, दो साल नहीं टूटेगी तो क्या आप किसी को कोई काम ही नहीं करने देंगे ?
मुश्किल यह है कि जो प्रशासनिक अधिकारी फैसले लेते हैं, उन्हें एक तारीख को वेतन मिल जाता है। घूमने को ड्राइवर सहित कार है। घर के काम के लिए नौकर है।वे उन लोगों का दर्द,परेशानी क्या जानें जिन्हें सुबह तय समय पर पानी भरना है, दूध,सब्जी लेकर आना है।दुकान ,कारखाने में दिन भर में आने वाले दस-बीस लोगों को भी एक मीटर के फासले पर खड़े रखना है। अपने कर्मचारियों की आधी – पूरी तनख्वाह देना है। अपने कर्ज चुकाने हैं। बिजली, पानी ,पेट्रोल,किराए के पैसे समय पर अदा करने हैं। नेतृत्व हां में हां मिलाकर खुश है, अपना पल्ला झाड़ रहा है ।
दुनिया की 777 करोड़ की आबादी में 6 माह में केवल सवा करोड़ लोग संक्रमित हुए हैं और 5.60 लाख मौत हुई है। इस तरह संक्रमण 0.16 प्रतिशत है और मौत का प्रतिशत नगण्य। केवल भारत में सड़क दुर्घटना से सालाना डेढ़ लाख मौत और विभिन्न बीमारियों से 70 लाख मौत होती है।
कृपया, अब  कोरोना का रोना बंद कर अपनी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने, दवा जल्द विकसित करने और लोगों में साहस व आत्म विश्वास बढ़ाने पर जोर दीजिए । लोगों से कहिए कि अपने काम – धंधे करें और एहतियात बरतें। आम जनता दूध पीता बच्चा नहीं है, जो पूरे समय मुंह में चमच डालकर रखें। अपनी चमड़ी बचाने के लिए लोगों को बेमौत मरने,पागल हो जाने,खुदकुशी करने के लिए सामान न जुटाया जाए।
देश में पहले ही बेरोजगारी कम नही है लेकिन जिनके पास रोजगार है कम से कम उनके तो मत छीनों।

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