ताजमहल जाना है…: द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत की जमीन से किए थे चीन पर हमले, मेरे दादा के हेलीकाप्टर पर भी हमला हुआ था : गैरीसन

  • अपने दादा की तरह गैरीसन भी भारत घूमना चाहता है, ताजमहल के आगे एक फोटो खींचवाना चाहता है।

‘ये वक्त द्वितीय विश्व युद्ध का था, जब अमेरिकी सेना ने चीन पर भारत की जमीन से हमले किए थे। सैकड़ों हेलीकाप्टर भारत के अरुणाचल प्रदेश से उड़ते और हिमालय पार करके चीन पर हमले करते। तब हेलीकाप्टर इतने सक्षम नहीं थे कि आसानी से दुश्मन पर गोले फैंककर निकल जायें। ऐसे में चीनी सेना ने कई अमेरिकी हेलीकाप्टर उड़ा दिए थे। एक वक्त ऐसा भी आया जब सैकड़ों की संख्या में अमेरिकी हेलीकाप्टर हिमालय के बीच से गायब हो गए। मेरे दादाजी भी एक हेलीकाप्टर से चीन पर गोले बरसा रहे थे। इस पर भी हमला हुआ, लेकिन शुक्र था कि उनके सिर्फ पैर में गोली लगी और वो बच गए। हमारा परिवार आज भी इस स्मृति को संजोकर रखे हुए हैं। उसी दौर में दादाजी ने भारत में ताजमहल देखा था, उसके साथ एक फोटो भी खींचा जो हमारे घर में प्रवेश करते ही आपको नजर आयेगा।’ यह कहानी अमेरीकी सेना के मेजर स्पांसर गैरिसन की है।

भारत और अमेरिकी युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे गैरिसन भारतीय पत्रकारों के साथ बहुत सहज रहे। उन्होंने बताया कि अमेरिका में भी ऐसे परिवारों की कमी नहीं है, जिनकी पीढ़ी दर पीढ़ी सेना में है। सेना में काम करना न सिर्फ गौरवशाली है बल्कि रोमांचक भी है। गैरीसन का कहना है कि मेरे दादा सेना में थे और उसके बाद मैं सेना में आया हूं। वो चाहते हैं कि उनके बच्चे भी सेना रहें और भारत आते-जाते रहें।

ताजमहल नहीं जाने का गम

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गैरीसन का कहना है कि वो ठीक उसी पोज में ताजमहल के आगे फोटो खींचवाना चाहते हैं, जहां मेरे दादा ने खिंचवाया था। वो फोटो उन्हीं के फ्रेम के पास ही अपने घर में लगाना भी है। इस युद्धाभ्यास में तो मैं आगरा नहीं जा सका, लेकिन लौटकर आऊंगा और ऐसा फोटो लूंगा। गैरीसन का कहना है कि ये एक प्रोफेशनल विजिट है, जहां से हम अपने स्तर पर कोई फेरबदल नहीं कर सकते। वैसे भी काेरोना के कारण बहुत सारी पाबंदियां है।

दुनियाभर में घूम चुके

दैनिक भास्कर से बातचीत में गैरीसन ने कहा कि मैं अफगानिस्तान, इरान, इराक सहित दुनिया के विभिन्न देशों में चलने वाले सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा हूं। इन देशों में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लिया है। भारत के साथ मिलकर आतंकवाद से यहां की परिस्थितियों में लड़ना सीखा है। आने वाले दौर में कभी जरूरत पड़ी तो यह स्ट्राइकर ब्रिगेड भारत के साथ मिलकर आतंक से लड़ने को तैयार है।