किसान रैलियों के जरिये ताकत दिखाएंगे सचिन पायलट, आज भरतपुर महापंचायत से होगा आगाज

राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) और उनके समर्थक विधायक अब प्रदेश में किसान सम्मेलनों और चक्का जाम के जरिए शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं. इनके जरिए वे CM अशोक गहलोत गुट और भाजपा को जवाब देंगे. साथ ही वह केंद्र सरकार के किसान विरोधी कानूनों पर भी दहाड़ेंगे. भरतपुर की डीग तहसील के बहज गांव में आज यानि शनिवार को पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के नेतृत्व में किसान महापंचायत की जा रही है. इसमें पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट और कांग्रेस जिला प्रभारी वेद प्रकाश सोलंकी भी आएंगे.

 

शुक्रवार को पायलट दौसा में हुई किसान महापंचायत में भाग ले चुके हैं, वहां उनके गुट विधायक भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे. इसके बाद 9 फरवरी को बयाना में भी किसान सम्मेलन होगा. इसमें भी सचिन पायलट का आना तय माना जा रहा है. डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेंद्र सिंह और बयाना विधायक अमर सिंह को पायलट का सबसे करीबी माना जाता है. चर्चा इस बात की हो रही है कि प्रदेश प्रभारी अजय माकन द्वारा घोषित डेडलाइन 31 जनवरी तक राजनीतिक नियुक्तियां और मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा. लेकिन, अब इसे बजट सत्र के नाम पर टाल दिया गया है, इसलिए पायलट खेमा एक बार फिर से सियासी बिसात बिछाने में जुट गया है.

3

 

पायलट 17 फरवरी को विधायक वेदप्रकाश सोलंकी के क्षेत्र चाकसू में भी जाएंगे. इधर, डांग इलाके के जैसोरा गांव स्थित फतेह सागर ताल पर 9 फरवरी को दोपहर 12 बजे किसान महापंचायत होगी. इसमें पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी आएंगे. प्रदेश कांग्रेस की ओर से महीने भर पहले किसान आंदोलन के समर्थन में सभी विधायकों को गांवों में जाकर किसान संवाद कार्यक्रम करने को कहा था, लेकिन पायलट समर्थक विधायकों ने इसमें खास रुचि नहीं दिखाई थी. लेकिन अब पायलट का खेमा किसान आंदोलन के बहाने सक्रिय हो गया है.

 

केंद्र को देंगे जवाब, किसान ही चलाता है देश
कृषि कानून के विरोध मे शनिवार को दोपहर 12 बजे डीग के गांव बहज में किसान महापंचायत होगी. पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन की आग अब गांवों तक भी पहुंचने लगी है. हम केंद्र सरकार के इन किसान विरोधी कानूनों का पुरजोर विरोध करते हैं. चूंकि बहज गांव उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है. इसलिए किसान महापंचायत के जरिए हम केंद्र सरकार को बताना चाहते हैं कि किसान ही इस देश को चलाता है. इसमें उत्तर प्रदेश के किसान भी शामिल होंगे.

गहलोत सरकार से खफा दिख रहा है पायलट खेमा
पायलट खुद के और समर्थक विधायकों की सरकार में अनदेखी से खफा है, इसलिए किसान आंदोलन के बहाने यह रैली पायलट का शक्ति प्रदर्शन भी है. गहलोत और कांग्रेस नेतृत्व को दिखाने के लिए पायलट समर्थक विधायक भी खूब गरजे. कांग्रेस विधायक पीआर मीणा ने कहा कि अगर पायलट राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता में ला सकते हैं तो पायलट को आगे किया गया तो वह केंद्र की सरकार को भी गिरा सकते हैं.

पूरे राजस्थान में रैलियों का रोडमैप
सचिन पायलट अब किसान आंदोलन के बहाने दौसा ही नहीं, पूरे राजस्थान में ऐसी रैलियों की तैयारी कर रहे हैं. खासकर पूर्वी राजस्थान में जहां पायलट का दबदबा है. इन किसान रैलियों के बहाने पायलट अपनी सियासी हैसियत और ताकत दिखाना चाहते हैं. इससे पहले कांग्रेस अपने स्तर पर जयपुर में भी किसान रैली में इतनी भीड़ नहीं जुटा पाई. भीड़ जुटाने के मामले में सचिन पायलट गहलोत को टक्कर दे रहे हैं.