ऐसा मामला आपने पहले कभी नहीं सुना होगा ,मरे हुए आदमी के खिलाफ ही कर दिया सिविल वाद

,बीकानेर। मर चुके व्यक्तियों के नाम पर राशन उठाने, उनकी जमीन-जायदाद हड़पने आदि के मामले आपने जरूर सुनें होंगे लेकिन अब जो मामला हम आपको बता रहे हैं ऐसा मामला आपने पहले कभी नहीं सुना होगा। एस के फ ाइनेंस नाम की एक कंपनी ने अपने ग्राहक की मौत के बाद उस पर सिविल वाद दायर करवाया है। मामला बीकानेर के पूगल से जुड़ा है।

पूगल निवासी शिवरतन सचदेवा ने जनवरी 2019 में एक महिंद्रा टीयूवी गाड़ी खरीदी थी। जिस पर एसके फाइनेंस से 6 लाख 95 हजार 780 रूपयों का ऋण लिया था। शिवरतन ने सारा ऋण 18 किश्तों में ही चुका दिया तथा कंपनी से रसीदें भी प्राप्त कर ली। इसके बाद अगस्त 2020 में शिवरतन की मृत्यु हो गई। शिवरतन की मृत्यु के बाद कंपनी ने उनकी पत्नी से तकादे शुरू कर दिए। शिवरतन की पत्नी आनंदी देवी ने चुकाए गए ऋण की रसीदें दिखा दी। लेकिन इस पर कंपनी नहीं मानी। दरअसल, कंपनी के कर्मचारी ने शिवरतन से पैसे लेकर रसीदें तो दी लेकिन कंपनी के खाते में पैसे जमा नहीं करवाए। कंपनी को जब यह ज्ञात हुआ तो स्वयं को नुकसान से बचाने के लिए ग्राहक की पत्नी पर दबाव बनाया जाने लगा। आनंदी देवी पूगल पुलिस थाने भी कई बार गई लेकिन पूगल पुलिस ने भी मुकदमा दर्ज करने के बजाय क ंपनी का समर्थन शुरू कर दिया। कंपनी का कहना था

कि आनंदी देवी कंपनी के कर्मचारी पर मुकदमा दर्ज करवाए तथा कंपनी को ऋण का भुगतान कर दे। उल्लेखनीय है कि कंपनी अथवा बैंक के काउंटर पर पैसे जमाकर करवाकर रसीद प्राप्त करने के बाद ग्राहक का दायित्व खत्म हो जाता है। उसके बाद अगर कंपनी अथवा बैंक में चोरी-डकैती हो जाए या क र्मचारी पैसे लेकर भाग जाए तो जिम्मेदारी कंपनी अथवा बैंक की बनती है। मगर यहां कंपनी ने आनंदी देवी को परेशान करना शुरू कर दिया। अंतिम रूप से मामला उजागर किया तो 31 दिसंबर 2020 को पूगल पुलिस ने आनंदी देवी के परिवाद पर कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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किया। लेकिन इस बीच 28 नवंबर को कंपनी के जयपुर स्थित हैड ऑफिस ने जयपुर के न्यायालय में आर्बीट्रैशन एंड कंसाइलेशन एक्ट 1996 संसोधित 2015 के तहत सिविल वाद दायर कर दिया। जिसका नोटिस अब जाकर ग्राहक के घर पहुंचा। कंपनी ने आरोप लगाया है कि शिवरतन ने समय पर किश्तें नहीं भरी तथा 428095 रूपए बकाया है। कंपनी ने जब शिवरतन से तकादा किया तो वह टालमटोल करने लगा। कंपनी को संदेह है कि शिवरतन वाहन को खुर्द बुर्द कर देगा। ऐसे में न्यायलय ऋण ग्रस्त वाहन पर कंपनी का क ब्जा दिलवाए।
जबकि आनंदी देवी के अधिवक्ता अनिल सोनी का कहना है कि कंपनी की स्थानीय ब्रांच को यह जानकारी है कि शिवरतन की अगस्त माह में ही मृत्यु हो गई तथा उसने पैसे जमा करवा दिए थे जिसकी रसीदें शिवरतन की पत्नी के पास है, इसके बावजूद न्यायालय के समक्ष गलत प्रस्तुति करते हुए तथ्य छुपाकर न्यायालय को गुमराह किया है।

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