उंगलियां चटकाना अच्छी आदत है या बुरी, क्या आप भी करते हैं? जानें इससे होने वाले फायदे और नुकसान!

उंगलियां चटकाना अच्छी आदत है या बुरी, क्या आप भी करते हैं? जानें इससे होने वाले फायदे और नुकसान!
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अक्सर खाली समय में लोगों को आपने उंगलियां चटकाते हुए देखा होगा. हो सकता है कि आपको भी उंगलियां चटकाने की आ​दत हो. घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर आपको उंगलियां चटकाते हुए देखने पर टोकते होंगे!

घर के बच्चों को उंगलियां नहीं चटकाने की सलाह तो दी जाती है, लेकिन वही बच्चे जब पूछते हैं कि क्यों नहीं चटकाना चाहिए तो बड़े इसका जवाब नहीं दे पाते!

कई बार घबराहट, बोरियत या खालीपन के कारण भी उंगलियों चटकाने की आदत पड़ जाती है. अक्सर लोग दिन में एक या दो बार तो उंगलियां चटका ही लेते हैं. बड़ों को देख कर छोटे बच्चे भी ऐसा करने लगते हैं और यह उनकी आदत में शुमार हो जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि उंगलियां चटकाना अच्छी आदत है या बुरी? इससे फायदे होते हैं या नुकसान?

अच्छी आदत है या बुरी?

ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर समरजीत चक्रवर्ती ने thehealthsite को बताया है कि ऐसा करना न तो अच्छी आदत है न ही बुरी आदत. कहा जाता है कि उंगलियां चटकाने से आपको बुखार, जोड़ों में दर्द जैसी समस्या हो सकती है, लेकिन डॉ चक्रवर्ती के अनुसार, इस तरह की कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है. इस तरह के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं, लेकिन कई हेल्थ स्टडी में ऐसा दावा किया गया है कि जोड़ों में दर्द या अन्य समस्या हो सकती है.

उंगलियां चटकाने पर क्यों आती है आवाज?

हमारे शरीर के कई अंग ढेर सारे हड्डियों के जुड़ने से बनता है. उंगलियों की दो हड्डियों के जोड़ के बीच में एक लिक्विड भरा होता है, जो हड्डियों में एक तरह से ग्रीसिंग का काम करता है. ये लिगामेंट साइनोवायल फ्लूइड होता है और यह हड्डियों के बेहतर मूवमेंट के लिए जरूरी होता है. जब बार-बार उंगलियां चटकाई जाती हैं तो इससे ये लिगामेंट कम होने लगता है और हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं. हड्डियों में भरे काबर्न डाई ऑक्साइड के बुलबुले फूटने लगते हैं. ऐसा होने और हड्डियों के रगड़ खाने से आवाज आती है.

क्या जोड़ों के दर्द से भी है संबंध?

उंगलियां चटकाने से जोड़ों के आसपास की मसल्स को आराम मिलता है, इसलिए लोग उंगलियां चटकाते हैं और ऐसा कर वे आराम महसूस करते हैं. कुछ हेल्थ स्टडीज में कहा गया है कि बार-बार उंगलियां चटकाने से उंगलियों में खिंचाव होता है और ये लिगामेंट्स के सीक्रिशन को प्रभावित करता है. हड्डियों में रगड़ पैदा होने से लंबे समय बाद आपको ये आर्थराइटिस का शिकार बना सकती है.

वहीं डॉक्टर बताते हैं कि जोड़ों के दर्द से इसका कोई खास संबंध नहीं है. कई मामलों में तो इससे जोड़ मुलायल बन सकते हैं और ये हाइपर-मोबाइल जॉइंट का कारण बन सकता है. क्लासिकल एरा के मशहूर वायलिन वादक और कंपोजर निकोलो पगानिनी मारफन सिंड्रोम (हाइपर-मोबाइल जॉइंट) से ही पीड़ित थे, लेकिन उनकी उंगलियां लंबी थी और वो अपने हाइपर-मोबाइल जॉइंट की वजह उस समय के दौरान बहुत ही आसानी से वायलिन बजाते थे.